सोमवार, 31 अक्टूबर 2011

मेरी माया'

मेरी माया'

ठंडी बयार कण बहणी चा ...२
हे दागड़या मेरी माया बथो णी चा 

घुन्घरल्या लटोली देख कण उड़णीचा..२
जीकोडी मेरी अपरा लटालो मा उलझाणीचा 
ठंडी बयार कण बहणी चा ...२

तेर सवाणी मुखडी माण ही माण मुश्कणी चा....२
मी थै बोल्या बाणणी ची 
ठंडी बयार कण बहणी चा ...२

नथोली मुद्री देख कण चमकाणी चा 
मी थै वा लोभाणी चा 
ठंडी बयार कण बहणी चा ...२

म्यार पहाड़ की बांद कण लस्क दस्का लगे की 
मेर दिल लुछी ले जांद च 
ठंडी बयार कण बहणी चा ...२

नाख्र्यली म्याल्दी ओ घ्स्यारी पहाडा की नार...२ 
मी थै अब रोज याद कीले आंद
ठंडी बयार कण बहणी चा ...२

घुघूती हीलंस सी  मी थै  उडी ले जांदा ...२ 
बुरांस प्युओंली देख ओ लज्जांद  
ठंडी बयार कण बहणी चा ...२

ठंडी बयार कण बहणी चा ...२
हे दागड़या मेरी माया बथो णी चा 

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 


कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

मेर पह्चाण

मेर पह्चाण
क्या च मेर रसयाण
क्या च मेर पह्चाण
रोंल्युं रोल्युं मै बग़द फिरूं
काफल कीन्गोड़ा चखाद फिरूं
क्या च मेर रसयाण......

चखाल सा मी उड़ता फिरूं
कभी आमी की डाली मा
कभी पिपाल की डाली मा
बैठता झूलता फिरूं
क्या च मेर रसयाण......

ये च मेर रसयाण
ये च मेर पह्चाण
मयारू तन मन म्यार खंड बाण
ये मेरु जीवन म्यार उत्तरखंड बाण
क्या च मेर रसयाण......

बीता दिणु बाण मी रडता फिरूं
या अंख्यु मा पेरता फिरूं
आपडा गड देश सपना संजोंता फिरूं
उत्तराखंड का बाण यूँ मी सोचता फिरूं
क्या च मेर रसयाण......

क्या च मेर रसयाण
क्या च मेर पह्चाण
रोंल्युं रोल्युं मै बग़द फिरूं
काफल कीन्गोड़ा चखाद फिरूं
क्या च मेर रसयाण......
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

रविवार, 30 अक्टूबर 2011

मेरा माटा कूड़ा

मेरा माटा कूड़ा 
मेरा माटा कूड़ा ध्यै लगाण छन
मेरा माटा का कूड़ा मेर दगडी बचाण छन 
आपरी आपरी छुईं लगाण छन 
गद देशा का इतिहास बताण छन 
मेरा माटा कूड़ा ध्यै लगाण छन.....

सीधु साधू हमरु जन जीवन 
सधारण हमरु देख रहन सहन 
कपाल ढकी काला काला पात्टरों
चोक लीपी गुअडू बल्दुओं का मोलोंण 
मेरा माटा कूड़ा ध्यै लगाण छन.....

अपरा संस्क्रती थै बचाण सजाण 
चोपाल मा पोणा देबता भावो बोलणा
खान्दुं मा देखा कुल-देबता पूजाणा 
चूलह को जलाण -भुझांण मेरु माटू को कुडू 
मेरा माटा कूड़ा ध्यै लगाण छन.....

दारा मंदरा गों गोंठ्यार ओ मेरा दार 
तिबारी डंडाली ओ फुलेरी फुलपत्ती
ओ मेरा गढ़ देस का बार-तीयोहार
एक कर याद आणो आज मी थै 
मेरा माटा कूड़ा ध्यै लगाण छन.....

आज टूटी उजाड़ पडीयुं छुं
बिरला कुकर को घार बाणी छुं 
कोणी देखादों मी थै गों को भैर करयूँ छुं 
मी थै याद आण वो बीता दीण ओ खुदीमा पड़युं छुं 


सीमैनटा कूड़ा आयी म्यार आस्त्तीवा गयाई
माया का लोभमा मा गढ़ रीटा वहाई
द्वेष राग भाईचारा देखा कखक लोकी ग्याई 
मेर दगडी देख त्य्रू बचपन भी छुटी ग्याई 
मेरा माटा कूड़ा ध्यै लगाण छन.....

मेरा माटा कूड़ा ध्यै लगाण छन
मेरा माटा का कूड़ा मेर दगडी बचाण छन 
आपरी आपरी छुईं लगाण छन 
गद देशा का इतिहास बताण छन 
मेरा माटा कूड़ा ध्यै लगाण छन.....

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

शनिवार, 29 अक्टूबर 2011

मन मा छुपी कोयेडी



 मन मा छुपी कोयेडी

छायी कोयेडी डंडा मा
छायी कोयेडी मन्ख्युं का गाम मा
बऊड़ी  बऊड़ी  की दुओड़ी
ये मेरी दुखेड़ी खुदैड़ी डंडा मा
छायी कोयेडी डंडा मा.......

पाल्या डंडा भी देखा जी
आल्या डंडा भी देखा जी
ब्योखुनी को ये बेलच्या
सबेर को ये सरू भेद च
छायी कोयेडी डंडा मा.......

मोड़ी मोड़ी सड्की मोड़ी गैनी
मुडी की पहडा को टुका पहुंच गैनी
डंडा डंडा णी रायां सब खेल च
म्यार नेता ठेकादारून का मेल चा
छायी कोयेडी डंडा मा.......

अब ये सच्णु क्या अब मांडू
प्रपंच माचयु ये खंड खंड चा
भ्स्ताचार की सत्ता मा देखा
सड़की मा भी अब माया चा
छायी कोयेडी डंडा मा.......

अन्ख्युं मा छायी सबकी कोयेडी
अड़ सबकी गीची देख मोंनं चा
जीकोड़ी मा सबकी छुप्युं डैर चा
सब शाबास कुछ ना बोल्याँ
ये उत्तरखंड चा ये उत्तराखंड चा
छायी कोयेडी डंडा मा.......

छायी कोयेडी डंडा मा
छायी कोयेडी मन्ख्युं का गाम मा
बऊड़ी  बऊड़ी  की दुओड़ी
ये मेरी दुखेड़ी खुदैड़ी डंडा मा
छायी कोयेडी डंडा मा.......

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
कवी बालकृष्ण डी ध्यानी

शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2011

याद येगे

याद येगे
आज फिर याद येगे मेरी सुवा
तेरी खुद मा जीकोडी ये गीत लगे दे
आंखी मा फिर सुओण मैना येगे
मनख्यूं का भीतर पानी रेघ मा समैगे
आज फिर याद येगे मेरी सुवा

जी मयारू कज्लाणु सै हुयेगै
काजोल पाणी भी देख कज्ल्याण हुयेगै
देखादु नीच मी थै सब धुन्ध्लाणु हुयेगै
मेरी सुवा कखाक लुकी गै
आज फिर याद येगे मेरी सुवा

जी देख कण मच्लाणु तैर बीगैर मेर सुवा
नींदी चैण सब जाणे कखाक हर्ची ग्याई
खाणु पीणु सब मेरु छुट ग्याई
बल मेरु ये हल क्या हुयेगैई
आज फिर याद येगे मेरी सुवा

आज फिर याद येगे मेरी सुवा
तेरी खुद मा जीकोडी ये गीत लगे दे
आंखी मा फिर सुओण मैना येगे
मनख्यूं का भीतर पानी रेघ मा समैगे
आज फिर याद येगे मेरी सुवा

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
कवी बालकृष्ण डी ध्यानी

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2011

आगे बड़ो तुम

आगे बड़ो तुम 

किस्मत से ना हरो तुम
चाहे वो तुमसे कितना खेले 
चलो निडर बनो आगे बड़ो तुम
पथ ने कितने कांटें लाख बिछे
किस्मत से ना हरो तुम...

लहू लुहन पग को ना देख 
उस पथ मे आगे बड़ो तुम 
एक मात्र लक्ष्यः हो तुम्हरा 
इस लक्ष्यः से कभी ना भटको तुम
किस्मत से ना हरो तुम...

संभालो विनाश होने से इस धरा को 
ये सी कथनी करनी ना करो तुम
आपनी इस वाणी और इस जीव्हा पर 
जरा सी लगाम अब धरो तुम 
किस्मत से ना हरो तुम...

नारा गूंजा सत्य का अब  
सत्य की रहा पर अब मिलकर चलो तुम
एक माशाल कंही दूर जली आशा की 
इस मशाल को ना अब बोझाऊ तुम 
किस्मत से ना हरो तुम...

किस्मत से ना हरो तुम
चाहे वो तुमसे कितना खेले 
चलो निडर बनो आगे बड़ो तुम
पथ ने कितने कांटें लाख बिछे
किस्मत से ना हरो तुम...

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

जुगराज रयां नेता जी

जुगराज रयां नेता जी

जुगराज रयां नेता जी इन कम करी दी (२)
मेर गढ़वाली बोली थै भाषा बाण दे 
राज्य सभा लोक सभा मा ये प्रस्तवा माणड़ दे (२)
मेर माय बोली थै भाषा बाण दे 

जुगराज रयां नेता जी इन कम करी दी (२)
दस साल हुग्यानी राज्य बाणीकी अस्थाई राजधानी बाणीकी 
गैरसैण को मेरी पहाडा की स्थाई राजधानी बाण दे 
क्रांतीकरीयुं के संग हमरी भी प्रीत नीभै दे 
मेर गढ़वाली बोली थै भाषा बाण दे 

जुगराज रयां नेता जी इन कम करी दी (२)
दस साल मा जिलों की देख कण बाड़ आय्नींचा 
प्रगती का नामा पर दारू का ठेखा बीका छान
उनको राद्द  कारकी बेटी बव्वारी की विपद हरी दे    
मेर गढ़वाली बोली थै भाषा बाण दे 

जुगराज रयां नेता जी इन कम करी दी (२)
बंजा पुन्गाडा रीटा डाँडो की रीट लगया छन
माटा कूड़ा मा देख कण अब माया ईट लगया छन 
परदेस गया भै भुल्युं की दाणी आंखी बाटा हेर लगया छन 
मेर गढ़वाली बोली थै भाषा बाण दे 

जुगराज रयां नेता जी इन कम करी दी (२)
मेर गढ़वाली बोली थै भाषा बाण दे 
राज्य सभा लोक सभा मा ये प्रस्तवा माणड़ दे (२)
मेर माय बोली थै भाषा बाण दे 

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी

मंगलवार, 25 अक्टूबर 2011

मी उत्तराखंडी छौ !

मी उत्तराखंडी छौ ! 

मी उत्तराखंडी छौ ! 
सीदु साधू भोलो भालू 
एक गढ़ वासी छुं 
बात करा णी कार याणी 
मेरी मी उत्तराखंडी छुं 

पर्वत माल मा बिछुं छुं गीजी छुं
पवन गंगा बोई दगडी बघी छुं 
पहाडी पहाडी बोला मी थै
यूँ दगडी खेल कूदे की बच्युं छुं 
मी उत्तराखंडी छौ ! 

बंजा पुंगडा देखा की रडयूँ  छुं
रीटा ड़णड़ बाण लड्युं  छुं 
गंगा थै बचाण बाण मरयूं छुं 
देश की राक्षा बाण शहीद होयूँ छुं
मी उत्तराखंडी छौ ! 

बोई छुडी की परदेश ग्यी छुं 
दार मंदर गों गोंठ्यार छुडी छुं
जी थै यकुली छुडी यकुली रोई छुं 
बाबा बोई खंड की खुद मा खोयी छुं
मी उत्तराखंडी छौ ! 

यकुला मनख्यूं मा खुदयुन छुं
अपरी अपरी मा कीले लग्युं छुं 
चुप चाप कीले अब तक बैठुन्चुं 
चल उठा जाग कीले सीयुं छु 
मी उत्तराखंडी छौ !  

मी उत्तराखंडी छौ ! 
सीदु साधू भोलो भालू 
एक गढ़ वासी छुं 
बात करा णी कार याणी 
मेरी मी उत्तराखंडी छुं 

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

सोमवार, 24 अक्टूबर 2011

तेर बोई क्या गोंती

तेर बोई क्या गोंती 

घुघूती बासूती 
तेर बोई क्या गोंती
बारमॉस मॉस ग्याई
मेरु जी घरु णी आई
घुघूती बासूती 

सात भईओं एक बीरा भैण 
सी बाडी बाडी 
मेरी भी खुठी मा चुभी ये 
भुल्हों काणडी काणडी 
घुघूती बासूती 

बुरांस प्योंली की हमजोली 
मी यकुली सी किले होली 
रामी बुहराणी सी मेर गाथा
जसी जैसी पतीवार्ता माता 
घुघूती बासूती 

म्यार गढ़वाल म्यार पासा 
मी कीले चूं आज उदासा 
येगी जग्वाल घारा घारा
स्वामी परदेश मी यकुली धारा
घुघूती बासूती 

घुघूती बासूती 
तेर बोई क्या गोंती
बारमॉस मॉस ग्याई
मेरु जी घरु णी आई
घुघूती बासूती 

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

शुभ दीपावली

शुभ दीपावली

जगमग जगमग जलते
दीपक तुम जलाऊ
दिये की रोशनी मै
अंधेरे को दूर भागओ
घर की दवार पर तुअरण लगऔ
चुआखट पर रनगोली साईं सजाऊ
न जाने कीस भेष
मै आयेगी लक्ष्मी माँ
दीप जलकर मईया को रहा दीखावो
फिर गणेश की पूजा के संग
माता लक्ष्मी को मानवों
पलकों को मूंद कर
माता आरती गाओ
प्रशाद बटकर
बच्चू के संग
फटाके जलाओ
इस तरह तुम अपनी दीपवली मनाओ
पलके मूंद तै ही
पल मै सवेरा हो जायेगा ख़ुशीयां ख़ुशीयां
छयी होगी हर तरफ
ना रहेगा गम का डेरा
जगमग जगमग जलते
दीपक तुम जलाऊ
दिये की रोशनी मै
अंधेरे को दूर भागओ
जय माँ लक्ष्मी
सब पर अपनी क्रिपया रखे
------------------------------
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

रविवार, 23 अक्टूबर 2011

मेरी माया

मेरी माया 

आज लगाणु गीत मी 
बल कण लगदु प्रीत ई 
मन ही मन हर्श्यणु मी 
बल की थै खोज्याणु आज मी 

मी थै माया ये ऊँचा हीमला 
मी थै घेरा ये मेरा कैलाशा 
झर झर ये गंगा की धारा
थांडु  ये म्यार पाणी का धारा
बल की थै खोज्याणु आज मी 

मी थै प्यार ये पुंगडा हमारा 
लाल्या कल्या बल्दुं का सारा 
ऊँचा डंडा मेरे जीकोड़ी का फैरा
निसा रोल्युं गदयानुँ  का पल-छाला 
बल की थै खोज्याणु आज मी 

भटकी भटकी जीवण मयारू 
बुरांस प्युओंली की च अब घरु 
कीन्गोड़ काफल की लगी बयार 
देख ले तू मेरु ये छूटु संसारु 
बल की थै खोज्याणु आज मी 

गड़ देश म्यार लगी अंग्वाल 
पहुंचा दे म्यरु भी अब  जग्वाल 
बद्री -केदरनाथ को खंड मयारू 
सब से नयारू उत्तराखंड हमरु 
बल की थै खोज्याणु आज मी 

रंयाँ कखक भी बस तेरु ख्याल 
तू ही मयारू पैलू तो ही मेरु मान 
तेरा बाण मी थै आयी अभिमान 
भारत देश भी काई तेरु गुण गान  
बल की थै खोज्याणु आज मी 

आज लगाणु गीत मी 
बल कण लगदु प्रीत ई 
मन ही मन हर्श्यणु मी 
बल की थै खोज्याणु आज मी 

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

शनिवार, 22 अक्टूबर 2011

आई जावा

आई जावा
आई जावा आई जावा म्यार गढ़ देश आई जावा
आई की घूमी जावा म्यार गढ़ घूमी जावा
आई जावा आई जावा
टेड मेडा सड़की का बाटा देखा घमुवदार रस्ता 
देख ले उन्दारू उकालू ओ ऊँचा नीसा डंडा 
आई जावा आई जावा
बुरांस प्योंली खिली दोई भैणी जणी मीली 
येकी भूलह तुम्ही कीन्गोडा काफल चखी जावा 
आई जावा आई जावा
देवभूमी ये मेरी न्यारी देवी देवतो को स्थान 
झुकी के भगवती का चारणु मारी जावा डुबकी हरीदवार
आई जावा आई जावा
देख लो टेहरी डैम जीम-कोर्बैट जंगल को पार्क
नयी टेहरी की क्या बात पुरनी टेहरी की पीड़ा अब भी पास 
आई जावा आई जावा
लैंस डोन का अलग ही ठाट गढ़वाल रायफल ऊँका पास 
शहीद होवा देश का खातीर अब भी ना मीली सम्मान 
आई जावा आई जावा
अलखनंद भगीरथी को संगम देव प्रयाग भी अब साथ 
गंगा देख बगती जांदा पहाड़ों अटकी भटकी भगी जांदी 
आई जावा आई जावा
पांडव भी आयी यख भीम को अहंकार ग्याई यख 
मया को देख भूलह भूली मेरा गों गों अहंकर बस्ग्याई अब 
आई जावा आई जावा
रोलयुं की छुडी बात हीन्शोला भी नी राई अब 
बंजा पड़ा म्यार पुंगडा पंतैदर भी छुट गयाई अब 
आई जावा आई जावा
रहयां म्यार भाई भूलह दारू दागडी देख सारा टुंडा पड़ा 
बाकी का म्यार भाई भूलह भुर र र र परदेश उड़यां 
आई जावा आई जावा
रीटा म्यार गढ़वाल अयैकी देखी देखी जावा 
हीमाला मेरु मान नारी शक्ती को म्यार प्रणाम 
आई जावा आई जावा
घुघूती की घुरू घुरू तुम आइकी सूणी जावा
उसकी आवाज मा म्यारी भैने बावरी की पीड़ा सूणी जावा 
आई जावा आई जावा 
बद्री-केदार कर मा चढ़ दे मेर भेली गुड की मीठास मा 
घुल जाये फिर से म्यार लोगों का गीच मा मेर गढ़वाली बोली 
आई जावा आई जावा 
बेडू पाको बारमास गढ़वाली गीतों मा झूमी जा 
बन्दों का लासका ढसका मा तू भी ढसका मारी जा 
आई जावा आई जावा 
आई जावा आई जावा म्यार गढ़ देश आई जावा
आई की घूमी जावा म्यार गढ़ घूमी जावा
आई जावा आई जावा
बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

उत्तरखंड चुनवा

उत्तरखंड चुनवा 

कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा 
नेता जी अब घूम घुमा नेताजी अब घुमा 
चुनवा की अब आयीं न्यारा अब आयीं न्यारा 
म्यार गड देश देखा जी अब नेताओं की भरमार 
कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा .....

कमल हाथ बेकार हाथी लालटेन ना ची तेल 
अपक्ष उमेदवार को मची च कण देख अँधेरा 
कण लगदा ये अब पहाड़ मा फेर शाम सवेर 
बस मची सत्ता की भुख अब तू भी भूलह देख 
कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा .....

भुख तीस मयारू गढ़वाल युंको उजडु सरू
पानी ना दे सकी पिणाकुंण दारू की च रेल पेल 
टुंडा कैकी चुनवा जीतता जीती की फुन्ड दूर फैंका 
कैन करना अब विश्वास पैला काई हमरु घात 
कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा .....

अब विचार मी छु पड़यूँ कै थै अब की बार की थै जीतावों
को करलो म्यार गढ़ की सेवा को खीलालो मी थै पैड
भ्स्ताचार को दूर भगलो जन लोक पल बिल को लालो 
म्यार गैर-सैण थै म्यार पहाड़ की राजधनी बनोलो 
कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा .....

सब थै एक थाली का चटा बाटा खाकी मा णा अब जंचता 
भरग्या युंक का नोटों का बस्त्ता मंहगे दगडी युंक रिश्ता 
अब मी क्या करूँ ये मेरा देबता तू ही बता दे अब रास्ता 
मयारू गड देश को हर एक बच्चा ध्यै लगदु अब तिथै आजा 
कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा .....

कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा 
नेता जी अब घूम घुमा नेताजी अब घुमा 
चुनवा की अब आयीं न्यारा अब आयीं न्यारा 
म्यार गड देश देखा जी अब नेताओं की भरमार 
कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा .....

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

गुरुवार, 20 अक्टूबर 2011

बुरांश २०११

बुरांश २०११ 

बुरांश खिली आज यख 
लगणी च कीले उदास वख 
हम भूलगे बुरांस थै या
बोरंस भुल्गे आज वख 
बुरांश खिली आज यख 

हर कबीता छन्दा गीतो मा खिली 
पहली बार उपन्यास मा छपी 
मी थै भी लेलो अंग्वाल अब 
तुम्हरू च बस मेरु सरू अब  
बुरांश खिली आज यख 

हिमाल की विपदा च मेरी 
देवभूमी की कथा च मेरी 
रीटा डंडा रडद मनख्यूं सी 
हेरत आँखों की दशा च मेरी 
बुरांश खिली आज यख 

यकुली सी मी यख लगुली 
कण लगदी बल कदगुली
नंगी खुठ्यों मा देख छुची
अब काँटों की वो कच्बोली 
बुरांश खिली आज यख 

बुरांश २०११ को अब साथ 
राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'को साथ 
और आप लोगों को प्यार 
जीवंत रहली देवभूमी की बोरंस
बुरांश खिली आज यख 

विषय - उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति पर केन्द्रित स्मारिका बुरांश 2011 के सन्दर्भ में .
प्रतिष्ठा में 
धन्यवाद जी और बधाई आपको .................

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 


कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

बुधवार, 19 अक्टूबर 2011

ना बचा मेरा कबीता

ना बचा मेरा कबीता

ना बचा ना बचा मेरा कबीता ..........(२)
को पड़लु मेर कबीता ठेस पुहंचाली 
आँखों बाटा भटैक भूलह भूली 
गंगा जमुना सी बहैली 
ना बचा ना बचा मेरा कबीता ..........(२)

पहाडा टुका बैठी मेर कबीता 
गादनीयुं छाल बीछी मेर कबीता 
बंजा पुंगड़ सी बंजा पडी मेर कबीता 
रीटा डंडा का सी हल सी मेर कबीता 
ना बचा ना बचा मेरा कबीता ..........(२)

गों गोल्युं मा गूंज मेर कबीता 
उन्दरी उकाला सी खैर मेर कबीता 
ग्श्यरीयुन गीतों थै गाती मेर कबीता
बंसरी धुन मा नाचती मेर कबीता 
ना बचा ना बचा मेरा कबीता ..........(२)

कै घार माया लागुदी मेर कबीता 
कै घार आलोचना सहती मेर कबीता 
चुप चाप कबैर खडी मेर कबीता 
कबैर हौअल्ल मचादी मे कबीता 
ना बचा ना बचा मेरा कबीता ..........(२)

ऊँचा हीमाला सी मेर कबीता 
उदस मनख्यूं मां बसी मेर कबीता 
की थै खोजनदी मेर कबीता 
बटा देख हेरती मेर कबीता 
ना बचा ना बचा मेरा कबीता ..........(२)

माँ भगवती ध्यै लगदी मेर कबीता 
माँ नंदा को मैत बुल्दी मेर कबीता 
ढोल दामो बजन्दी मेर कबीता 
नरशिँगा सी गरजती मेर कबीता 
ना बचा ना बचा मेरा कबीता ..........(२)

जन चेतना फैलती मेर कबीता 
दारू का बाटा भुलाती मेर कबीता 
नारी सम्मान सेखादी मेर कबीता 
मील जुली का पाठ पड़ती मेर कबीता 
ना बचा ना बचा मेरा कबीता ..........(२)

सीयाँ सरकार जगदी मेर कबीता 
लोगों थै सचेत करदी मेर कबीता 
देहरादुन माँ स्प्नीयाँ देखदी मेर कबीता 
गैरसैंण मा क्रांतीकारीयुं शपथ भूलती मेर कबीता 
ना बचा ना बचा मेरा कबीता ..........(२)

मेर कबीता मेर उत्तराखंड च 
मेर कबीता मेर तन मन च 
मेर कबीता देवभूमी क दर्पण च 
मेर कबीता अब तेरा कबीता च ?
बचा बचा अब मेर ना अब तेर कबीता च .......(२)

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

  

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

मंगलवार, 18 अक्टूबर 2011

कण आयी

कण आयी

कण आयी कण ग्याई
ये हिमाल मा ये देसा मा 
सवेर सवेर वाहाई दोपहरी 
ब्योखनी बाद झण रात वाहाई 
कण आयी कण ग्याई...........
बद्री-केदार मा नंदा का मैता मा 

हे विपदा हे खैरी तू आयी 
बस्गयाई ये हे उकाला मा 
यूँ कणड़लीयुं का बाटा मा 
दना बोडयूँ का आंख मा 
कण आयी कण ग्याई...........
वीर बडो का श्री सुमन का देश मा 

भुख तीश को साथ 
याखा छायूँ बारामास 
देख दूर उमली बरसात
बेटी बावरी का पास 
कण आयी कण ग्याई...........
ये गडवाल मंडल मा ये कुमो मंडल मा 

नुनो थै बड़ा क्यायी 
सीखी पडी बावरी आयी 
बेटा  झट परदेस ग्याई 
ब्वारी रामी सी हेरती रहई
कण आयी कण ग्याई...........
ये तीलू ये जशी का देश मा 

ये मेरु जीवण सब देख्तु रहई 
अन्ख्युं गंगा धार बहई
भगीरथी सी मेरी विपदा 
बल मोक्ष ना पाई 
कण आयी कण ग्याई...........
ये देव भूमी मा ये पहाडा मा 

कण आयी कण ग्याई
ये हिमाल मा ये देसा मा 
सवेर सवेर वाहाई दोपहरी 
ब्योखनी बाद झण रात वाहाई 
कण आयी कण ग्याई...........
बद्री-केदार मा नंदा का मैता मा 

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 


कवी बालकृष्ण डी ध्यानी

मै आम हों

मै आम हों 

मै आम था आम रहा 
खास मै ना बन सखा 
अपनी वेदना विलाप 
नयनों से ना बहा सखा

काम वसाना माया 
को ना त्याग सखा 
मार्ग केंअवसर को 
कभी ना ताड़ सखा 
मै आम था आम रहा 

मील के पत्थर की तरह
एक ही जगह आड़ रह
आये गाये कीतने कारवां 
मै वही का वही पड़ रह 
मै आम था आम रहा 

सब कुछ मूक आँखों 
चुप चाप निहरता रहा 
अपने ही हाथों से मै
विचारूं बंद करता रह 
मै आम था आम रहा 

भीड़ मै अकेला होने 
का गर्व दंभ भरता रहा 
दोसरों पर उछाले कसीन्दो पर 
यूँ ही मै हंसता रहा 
मै आम था आम रहा 

आपने इस बरताव से 
मै हरदम यूँ ही पीसता रहा 
रोज रोज मै चूल्हों भर 
पानी मै यूँ ही मरता रहा 
मै आम था आम रहा 

मै आम था आम रहा 
खास मै ना बन सखा 
अपनी वेदना विलाप 
नयनों से ना बहा सखा

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

सोमवार, 17 अक्टूबर 2011

कण मची च दूण दूण ......

कण मची च दूण दूण ......

मांस खायी सुघोंरों की अब  
खेत उजाड़ी सुघोंरों णा
बंदरों,गौणी की गुंज गुंज 
कण मची च दूण दूण ......

रीटा रीटा गौं गोंठयारा
रीटा म्यार ये डंडा कंडा
बाघ ला कखक पाणी अब शिखार 
गाम गाम घुशी की मचाई उत्पात 
कण मची च दूण दूण ......

माँ भगवती को प्रसाद 
बोकटयूँ मान चली धार 
छुपी लुकी लुकी पंडों णा 
घार खाई भुण भुण  
कण मची च दूण दूण ......

पह्ड़ा की नारी बेटी बावरी 
याखुली खड़ी एक धारी 
दारू ,घार बंजा पुंगडा 
सास ससुर नुआनॉ की जीमेदरी 
कण मची च दूण दूण ......

सब अब बेल खेल की बात 
नेताओं की आणी बारात
विधान सभा चुनवा नजदीक
देख सत्ता की अब च्क्रचाल 
कण मची च दूण दूण ......

मांस खायी सुघोंरों की अब  
खेत उजाड़ी सुघोंरों णा
बंदरों,गौणी की गुंज गुंज 
कण मची च दूण दूण ......

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत


कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

अकेला हँसता जाता है.

अकेला हँसता जाता है.

एक रिश्ता ऐसा भी 
जो दुःख दर्द ले आता है 
घाव मै वो देखो दोस्तों 
अकेला हँसता जाता है.....

आंखें किसी की भीगी देख कर
अपनी आंखें क्यों भिगो जाता है 
दर्द का ही वो रिश्ता है दोस्तों 
जो अंशुओं बनकर बहता है 
अकेला हँसता जाता है.......

तकलीफों मै घिरा हर वो शख्स 
अपने से ही क्यों भागा फिरता है 
एक वक़त ऐसा भी आता है दोस्तों
उस डर के साथ वो मारा जाता है 
अकेला हँसता जाता है.......

पर्वतों को चीर कर झरने 
बलखाती नदी का रूप लेती है 
सर्पाकार वेदना मै बहकर 
दुखों के सागर मै समा जाती है 
अकेला हँसता जाता है.......

एक रिश्ता ऐसा भी 
जो दुःख दर्द ले आता है 
घाव मै वो देखो दोस्तों 
अकेला हँसता जाता है.....

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

रविवार, 16 अक्टूबर 2011

"फिर बॉडी ऐगे बग्वाल"


"फिर बॉडी ऐगे बग्वाल"

ऊँचा धाम छुड़ीकी  
कैलाश गाम  छुड़ीकी  
बॉडी बॉडी के ऐगे जग्व्ला
मुम्बा धाम ऐगे ऐगे बग्वाल......

उत्तरखंड भाटैकी 
नाच-धाज सजैकी
डोली मा बैठिकी  
ढोल दामू बजैकी 
मुम्बा धाम ऐगे ऐगे बग्वाल.....

गों का बाटा भुलायाँ
खैनी कामणी बाण शहर मा बस्याँ 
ओंका का दर्शना को 
मा नंदा खुद येगेई चलैकी 
मुम्बा धाम ऐगे ऐगे बग्वाल......

चला भुल्हो चला दिदो 
माटुंगा अब सब जोंला 
कर्नाटक संघ हॉल मा 
माँ नन्दा थै भेंटी ओंला 
मुम्बा धाम ऐगे ऐगे बग्वाल.......

ऊँचा धाम छुड़ीकी  
कैलाश गाम  छुड़ीकी  
बॉडी बॉडी के ऐगे जग्व्ला
मुम्बा धाम ऐगे ऐगे बग्वाल.....

जय माँ तेरी सदा ही जय ऊँचा पहाड़ की माँ नंदा राज-राजेश्वारी 

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

निर्देशक बलदेव राणा जी एवं संयोजक राकेश पुंडीर जी
स्थान कर्नाटक संघ हॉल माटुंगा वेस्ट 24 अक्टूबर 2011 समय शाम 7 बजे से
contect number
9820021546
9920403996

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी

शनिवार, 15 अक्टूबर 2011

करवाचौथ और मेरी निर्जला

करवाचौथ और मेरी निर्जला 

मै और मेरी निर्जला 
करवाचौथ और चन्द्रमा 
सलमती और सात जन्मों का साथ 
दिनभर की भुख और राता का इन्तजार 
बदली मै वो छुपा चंदा 
निकल आएगा आज 
गोलकर छानी मै छानकर 
मै और मेरी निर्जला............. 

देखने उस चाँद को आज 
जो पल हर पल तेरे साथ 
संगनी वो जीवन सजनी 
कर थोड और इन्तजार 
निकल आएगा वो चाँद 
इस चाँद  के साथ साथ 
मै और मेरी निर्जला..............

कार्तिक कृष्ण पक्ष 
चतुर्थी की करकचतुर्थी 
मै चंद्रोदय व्यापिनी
आयु, आरोग्य, सौभाग्य 
संकल्प लेकर ले निराहार 
मेरी रागिनी हे चाँद ना कर देर 
आजा आज मेरे साथ 
छान छानकर तो देने 
आपना ये शुभ आशीष 
मै और मेरी निर्जला.............

मै और मेरी निर्जला 
करवाचौथ और चन्द्रमा 
सलमती और सात जन्मों का साथ 
दिनभर की भुख और राता का इन्तजार 
बदली मै वो छुपा चंदा 
निकल आएगा आज 
गोलकर छानी मै छानकर 
मै और मेरी निर्जला ...........

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत


कवी बालकृष्ण डी ध्यानी

शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2011

मी मज्हया मनात अडकवून गेलो


मी मज्हया मनात अडकवून गेलो

मी मज्हया मनात अडकवून गेलो 
बाहेर येनाचा प्रयतन केले
पण बाहेर येऊ शकालू नहीं 
मी मज्हया मनात अडकवून रहिलू 

दोहरी भूमिका माला कधी समजली नहीं
मी येकंकी मधे रंगत रहिलू
कधी कधी विचार आला 
पण तू व्यर्थच आला 
मी मज्हया मनात अडकवून रहिलू 

घबराता ,बिनधास  कधी
जगच्या  अटहाश कधी 
नील आसमानी मनात 
विचाराची पतंग बद्वत रहिलू
कुणी तरी कपिला या भीते नै
आपल्या भावती लापवेत रहिलू
मी मज्हया मनात अडकवून रहिलू  

बहिर जानयाचा धाश झाला नहीं
हिरवी रान्त  फिरलू याचा भाष  झाला नहीं
ओले चिम्बा  पावस नै भिजलो 
अणि मी स्वतवर चिडलो
माला माझे प्रतिबिम्बा पार करता अल नहीं

मी मज्हया मनात अडकवून गेलो 
बाहेर येनाचा प्रयतन केले
पण बाहेर येऊ शकालू नहीं 
मी मज्हया मनात अडकवून रहिलू

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
------------------------------

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

जड़ चेतना




जड़ चेतना 

जीवन जड़ चेतना का उमंग 
सहधीर्द्दाता अडिगता 
की है पहचान 
कविता का सरल शब्दूं 
मै अविष्कार 
समधुर शब्दूं की बोली
सजीव होने का प्रमाण है
काठनायिऊँ लड़नै की ढाल  है
परेशनीयूं से निकल नै का हल
श्रेष्ट पुहचाने की रहा 
जीवन संघर्ष 
का आहावन
सीधी और सरल शब्दूं 
मै भाव प्रकट  कर 
संजीदागी से 
तल्मेलता कोमलता 
से विचार ही
जिंददली जीने की पुकार है 
जीवन कल कल 
बहती नदी की तरह है 
सत सत आगे बढने
की पहचाना है 
जीवन हर पल एक नयी कहानी
क्या लिखूं क्या कहूं जीवन 
जीवन जड़ चेतना का उमंग 
सहधीर्द्दाता अडिगता 
की है पहचान

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत


कवी बालकृष्ण डी ध्यानी

एक टीश च

एक टीश च

मेरे कविता मा एक टीश च
मनख्यूं देख कण धीट चा 
राडाद रहैन्दी फजल ब्योखनी 
रात दगडी उनकी खास भेंटच 
मेरे कविता मा एक टीश च

रुंतैला मुल्क मेरु गढ़ देश 
ऊँचा ऊँचा हीमाला तू भी देख 
म्यार ये चीपलाणु सा भेष 
उजाड़ खाडू मयारू डंडूयूँ का देश 
मेरे कविता मा एक टीश च

काला काला रेघ खिंचा 
जख भी जावा वाख भींचा 
प्रगती का मार्ग मा देख 
झाडा टुका तक वा बीछा
मेरे कविता मा एक टीश च

पलायन एक समस्या च 
लोगों का माण बस फिरयाँ छान
नीसडू का बोल्दा बस अब साथ च
उकाला मा बस खैरी की बातच 
मेरे कविता मा एक टीश च

यख नारी की बल क्या बातच 
मी थै भगवती तेरु ही साथ च 
गैरसैंण मा बल गड अटकी राइणी
देहरादुन राजधनी की देख दहल-पैलच 
मेरे कविता मा एक टीश च

मेरे कविता मा एक टीश च
मनख्यूं देख कण धीट चा 
राडाद रहैन्दी फजल ब्योखनी 
रात दगडी उनकी खास भेंटच 
मेरे कविता मा एक टीश च

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011

कण भाग

कण भाग 

कण भाग माण मेरु  
कण दुओड़ तन मेरु 
ऊँचा पहड़ छुडकी मेरु
कण भाग भग्या मेरु 
कण भाग माण मेरु  ...............

हे हीमाला हे माया भुमी
ऊँचा कैलाश को थाना 
है बद्री हे केदार बाबा
जुग जुग बाटी तेरु बखान  
कण भाग माण मेरु  ...............

गो गुल्युओं का मेरु रटाण 
बाटा सड़की छुड़ कखक भगण
मन परदेस मा कखक लगण
टका की माया भुलंह अब सब भूलहण 
कण भाग माण मेरु  ...............

बीता दीणु की लगी रैन
बरखा बरसी अन्ख्न्युं का घेण 
ये परदेस मी यकुली यकुली रैण 
बाबा भुली बौई की याद अब बस आईण 
कण भाग माण मेरु  ...............

कण भाग माण मेरु  
कण दुओड़ तन मेरु 
ऊँचा पहड़ छुडकी मेरु
कण भाग भग्या मेरु 
कण भाग माण मेरु  ...............

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

बुधवार, 12 अक्टूबर 2011

जओंला

जओंला 

चल दगडी जओंला 
पहड़ घूमी ओंला 
म्यार गों गोंल्युनो फिरी ओंला 
अपड़ा पराया भेंटी ओंला

वख नारंगी की रसीली दाणी 
कीन्गोड काफल की डाली 
घुघूती हीलंस जाणी पंखी 
उजड़ा पड़यूँ देख म्यार गड की झांकी 
चल दगडी जओंला 

सड़की  मोडे गैनी
पर म्यार आपड़
अब तक णी मोडे णी
चखाल बनके कखक उड़े गैनी  
चल दगडी जओंला 

मील णी जाणी 
खैरी की कमाणी  
नीसड़ो बाटों गै 
की जा कै हरची
चल दगडी जओंला 

चल दगडी जओंला 
पहड़ घूमी ओंला 
म्यार गों गोंल्युनो फिरी ओंला 
अपड़ा पराया भेंटी ओंला

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत


कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

दुनिया


दुनिया 

दुनिया बनाने वाले
क्यों तो ने दुनिया बनाई 
सेठ खाये यंह बैठे बैठे मलाई 
दुनिया बनाने वाले................

महंगाई की चोट से 
हम हो गये भीखरी 
गरीबी मै क्या खोट है 
इस से चले ना दुनिया दरी  
दुनिया बनाने वाले................

आमीरी की खाई मे 
सो गये कीतने ही भाई
लड़ी उनोने आपने तरीके से लडाई
गरीबी फिर भी ना जीत पायी 
दुनिया बनाने वाले................

ये अंतर कब मीटेगा
समजादे मुझे मेरे साईं 
ये बोझ कब उतरेगा 
बतला दे मेरे साईं   
दुनिया बनाने वाले................

दुनिया बनाने वाले
क्यों तो ने दुनिया बनाई 
सेठ खाये यंह बैठे बैठे मलाई 
दुनिया बनाने वाले................

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

काण बोलो

काण बोलो 

माया लगी रे
काण बोलो 
मुख खोंलो 
मेरी माया बींगा दे छुरी 
आंखी की यूँ साणी ण  रे  
माया लगी रे

हीमाला टुक देखो रे 
गदनीयुं संग बोगो रे 
हीशोंओल टीप दे 
काफल चख दे छुरी 
तेर संग मेरी अब 
माया लगी रे

उकालू उन्दारू बाटा रे 
ओ सड़की  ओ घाट रे 
पडैगी जा मनख्यूं का बाता रे 
गहशरीयुं गीतों गुंजता डंडा रे
छुची तो भी गीत लगा  माया का रे 
माया लगी रे

दागडीयूँ  को साथ रे 
करले मेर दगडी बाता रे
जवाणी को दुई घड़ी को साथ रे 
पखड़ ले अब मेरा हाथा रे 
जीवण भर हम लागोंला माया रे 
माया लगी रे

माया लगी रे
काण बोलो 
मुख खोंलो 
मेरी माया बींगा दे छुरी 
आंखी की यूँ साणी ण  रे  
माया लगी रे

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

आज खोया सा



आज खोया सा

आज कंही खोया सा 
यंही कंही खोया सा 
ये दिल जो नंदा सा 
अभी अभी खोया सा 
आज कंही खोया सा 

चेहर जो खोया सा 
चेहरा वो लगा देख सा 
वो क्यों लगा अपना सा 
वो चेहर अभी अभी 
आज कंही खोया सा 

आशीकी का वो जादु 
अभी अभी सीखा सा 
नजरों ने नजरों से
कुछ बोझ और कुछ पूछा सा 
आज कंही खोया सा 

पलकें झुकान तेरा 
कुछ गुनगुना तेरा 
होलै से धीरे से वो अदा
मै मुस्कराना तेरा 
आज कंही खोया सा 

आज कंही खोया सा 
यंही कंही खोया सा 
ये दिल जो नंदा सा 
अभी अभी खोया सा 
आज कंही खोया सा 

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षी

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी

सोमवार, 10 अक्टूबर 2011

ओ जानेना


ओ जानेना
ये दिल क्या तो ढ़ोंडै ओ जानेना ...........२ 
है क्या तेरी मंजील ये जानेना 
ये दिल क्या तो .........
बातों की सजी महफिल ये जानेना 
कट रहे तेरे बीन पल छिन ये जानेना 
ये दिल क्या तो .........
जब ये उदास होता है ये जानेना 
तो कोई आस पास होता ये जानेना 
ये दिल क्या तो .........
बरस रही बरसात ये जानेना 
क्या सिर्फ आँखों की हो रही बात ये जानेना 
ये दिल क्या तो .........
एक कारवां गुजरा जाता है ये जाने ये 
एक नया कोई आता है ये जानेना ना 
ये दिल क्या तो ढ़ोंडै ओ जानेना ...........२ 
है क्या तेरी मंजील ये जानेना 
बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

कहं तुम चले गये


कहं तुम चले गये 

जग के मोहन
मोहते मोहते जगजीत हो गये 
गजल की गुमसुदी को एक होश दे गये
हुशनो वालों की शिकयत
का तरानुम दे गये
चेहरे को एक नया रूप दे गये 
आशीकी को नया आयाम दे गये 
मोशीकी का नया अंदाजा ढल गये
गजल उडने का परवाज दे गये 
जीवनी के दर्द को 
अपने सुर मै ढल गये 
विकास का हाथ पकड़कर 
चित्रा को अकेले छुड़ गये 
गुनगुने यकांत अकेले मै 
ओ आपना साजा छुड गये 
इस महफ़िल छुडकार
न जाने किस और चले गये 
चीट्ठी ना कोई सन्देश 
ओ मेरे गजल के देश 
आवाज लगती है अब 
कंहा तुम चले गये 
जग के मोहन
मोहते मोहते जगजीत हो गये 
गजल की गुमसुदी को एक होश दे गये
हुशनो वालों की शिकयत
का तरानुम दे गये

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

रविवार, 9 अक्टूबर 2011

वो क्या ?

वो क्या ?

वो बातें आँखों ने कही तुमने सुनी क्या 
रातें सील्वाटों पर उभरी तुम पर कभी गुजरी क्या 
एक टक देख तै रहना मेरा इंतजार था क्या 
तुम्हारी छावी से बातें करना वो मेरा प्यार था क्या 
वो बातें आँखों...............................

माथे पर घिरी पसीनो की बूंदे परेशनी है क्या 
पैशनी की उभरी लकीरों छुपी प्यारा की कहानी है क्या 
बीते दिनों बीते पलों की कोई निशानी है क्या 
अटखेली लेती होई मासुम जवानी है क्या 
वो बातें आँखों...............................

दूर लो की तरह जलती कोई बत्ती हो क्या 
दिये मै फैले तेल की साथी हो क्या 
रोशन ऊपर अंदर अंधेरे की खाई हो क्या 
मीलों दूर फ़ैली लंबी कोई जुदाई हो क्या 
वो बातें आँखों...............................

वो बातें आँखों ने कही तुमने सुनी क्या 
रातें सील्वाटों पर उभरी तुम पर कभी गुजरी क्या 
एक टक देख तै रहना मेरा इंतजार था क्या 
तुम्हारी छावी से बातें करना वो मेरा प्यार था क्या 
वो बातें आँखों...............................

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी

मै रावाण


मै रावाण 
हल मै होये दशहरा पर्व पर अजब बात हो गई
रवांण की प्रती को मुझे जलाने का अवसर आया 
बडे उलसा पूर्वक मै मशाल थमी और रवाण अग्नी हवाले कर दिया 
जल ने के बाद मुझ को अफशोस होवा 
दिल ने आवाज दी 
प्रती रूप रावाण को रखा कर दिया 
पर मन मै छुपे रवाण को ना मर सका 
कम क्रोद अहंकार को ना त्यागा सका 
मन के रवाण को ना मारा सखा 
मित्रों मेरी मदद करो 
या तुम भी मेरे संग चलो 

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

अपने अपने


अपने अपने 

दर्द बनकर सिर्फ दर्द उभरा था 
आँखों के रास्ते वो सिर्फ बहा था 
सपनो का संग लेकर वो देखो 
अताह मन के सागर मै वो डूबा था 
अपने अपने 

क्या पाया क्या उसने खोया था 
दर्द ही को उसने उसे बस धोया 
सपने जो सजाया इस दिल नै 
आँखों बस उसे तोडा औरत्यागा 
अपने अपने 

बस इतना ही भेद बस इतना ही खेल था
रचया था जो मन नै मेरे रीझ्या था तन को मेरे 
फुलं संग तू कभी काँटों संग मेल था
दर्द का बस आरंभ पर अंत का न छुर था 
अपने अपने 

दर्द बनकर सिर्फ दर्द उभरा था 
आँखों के रास्ते वो सिर्फ बहा था 
सपनो का संग लेकर वो देखो 
अताह मन के सागर मै वो डूबा था 
अपने अपने 

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी

जीकोडी को उमाल


जीकोडी को उमाल 

बारामास म्यार पहाड़ों मा..............२
तासों उदास म्यार पहाड़ों मा ............२

मण को तिश म्यार पहाड़ों मा .......२
ठंडो मीठो पाणी म्यार पहाड़ों मा .......२
बारामास म्यार 

घुघूती को घुरो म्यार पहाड़ों मा .......२
मैता को खुदु म्यार पहाड़ों मा .......२
बारामास म्यार 

बोरंश खीलो म्यार पहाड़ों मा .......२
काफल पक्युओ म्यार पहाड़ों मा .......२
बारामास म्यार 

होली की होल्यार म्यार पहाड़ों मा .......२
ओझो को ढोल बन्दों का लासका म्यार पहाड़ों मा .......२
बारामास म्यार 

उकाला उन्दारो म्यार पहाड़ों मा .......२
पीड़ा खैरी बारामास म्यार पहाड़ों मा..............२
बारामास म्यार 

दूर डंडी को बंशी बजाणो म्यार पहाड़ों मा..............२
को गुअर चरंदो म्यार पहाड़ों मा..............२
बारामास म्यार 

बंजा पुन्गाडी की दिशाधणी म्यार पहाड़ों मा..............२
रीता होग्या गों घुठ्यार म्यार पहाड़ों मा..............२
बारामास म्यार 

ऊँचा कैलाश म्यार पहाड़ों मा..............२
केले छुड गै सब आस म्यार पहाड़ों मा..............२
बारामास म्यार 

भगवती को मांडाण म्यार पहाड़ों मा..............२
सब थै सुखी संथ रखी म्यार पहाड़ों मा..............२
बारामास म्यार 

कण उजाड़ उजाड़ होयुं म्यार पहाड़ों मा..............२
आंखी को उमाल कीले भैरअंदो म्यार पहाड़ों मा..............२
बारामास म्यार 

बारामास म्यार पहाड़ों मा..............२
तासों उदास म्यार पहाड़ों मा ............२

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 


कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 

शनिवार, 8 अक्टूबर 2011

अब

अब 

अब मै भी जान गया हों 
लोगों को पहचान गया हों 

बातों से आपने ही हर गया हूँ 
कलम के आपने पार गया हूँ 
लोगों को पहचान गया हों 

मौका मील मै भी ताड़ गया हूँ
ऐसे कैसे मै सबसे हर गया हूँ 
अब मै भी जान गया हों 

धन की मंडी मै बिक गया हों
मर मर के मै भी जी गया हूँ 
लोगों को पहचान गया हों 

आवाज दी थी कभी हजरून नै 
आज विरानो मै गुम होआ हूँ 
अब मै भी जान गया हों 

एक हस्ती थी मेरी भी 
उस बस्ती ना जाने कहाँ खो गया हों 
लोगों को पहचान गया हों 

अब मै भी जान गया हों 
लोगों को पहचान गया हों 

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी