शाम को कुछ इस तरहां से आया मै
शाम को कुछ इस तरहां से आया मै
जाम को हाथों से कुछ इस तरहं से उठया मैने
शाम को ..................
काले से अंधेरे मै और मेरे साथ आया
मेरे ही काले साये नै मुझे बदनाम किया
शाम को ..................
फिर गीरी बरसात ओ लहमों की रात थी
फिर होई ओ बात आ गयी उनकी याद थी
शाम को ..................
आंखें नम और उनकी ओ हर बात
एक-एक कर ही खुलेंगे सारे राज
शाम को ................
तनहा मै और मेरे साथ ओ शाम थी
बीते पालूं बीते दिनों की रखा थी
शाम को ................
अहशास का सितारा असमान मै चमका
सुबह होई तब भी ओ और तन्हाई मेरे साथ थी
शाम को ................
शाम को कुछ इस तरहां से आया मै
जाम को हाथों से कुछ इस तरहं से उठया मैने
शाम को ..................
बालकृष्ण डी ध्यानी
देव भूमी बद्री केदार नाथ
कवी बालकृष्ण डी ध्यानी


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