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युवा है हम


युवा है हम
आज हम खुश हैं
जीवन के इस दोअड मै
कोई नहीं छोर है अब
दूर खिली देखो ओ भोर है
चीडेयों की चहक से
मन आनंद विभोर है
रवि की कीरणों से
प्रकाशीत आँखों की कोर है
छुने को असमान मेरे
हम अहविहल इस और हैं
उत्तरखंड के हम है सानी
युवा है हम नया दूस्ट्री कोण है
गंगा है वो तो भगीरथ हम है
अवतरीत करेंगे इस मन मै
ये हमरा आत्मा का प्रण है
मोक्ष की तरहं बाहेंगे हम
मतरूभूमी के कण कण मै
विचारों की गंगा कहलायेंगे
और एक नयी क्रांती लायेंगे
सुखसमर्धी फैलायेंगे हर और
एक नयी दिशा भारत को दिखयेंगे
चलो हम सब मिलकर
अपना उताराखंड सजायेंगे
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत


कवी बालकृष्ण डी ध्यानी
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