
सोच रै भग्यान
बगत जाणे कब काल बुलादु
काल तीन भगामा बटयूँ हून्दन..... रै भग्याना
कैका काल मा कु बैठू
भुत वर्त्तमान भविष्य कु फेरु
बगत जाणे कब काल बुलादु
देख ऐ त्रीकाल खेली
मरघट बाबा कि त्रीनेत्रों कु जोड़ा
बालपंन,जवानी,बुढ़ापा कु फेरा
कैका मिलदु थोड़ो कैकु जाद
बगत जाणे कब काल बुलादु
काल तीन भगामा बटयूँ हून्दन..... रै भग्याना
कैका काल मा कु बैठू
संसार कु भी तीन दन्त
आकाश धरती पातळ संग
तेरु भी ता छे रै तीन अंग
मुंड,धड़,खुठा पर क्या कैर तीन
बगत जाणे कब काल बुलादु
काल तीन भगामा बटयूँ हून्दन..... रै भग्याना
कैका काल मा कु बैठू
मील क्या बोलण अब तैकू
कभीत बोल दै अपरू दगड
यूँ खुल्याँ का खुल्या ही गयाई
जीवन तेरु तीन ताड़ा ही रहई
बगत जाणे कब काल बुलादु
काल तीन भगामा बटयूँ हून्दन..... रै भग्याना
कैका काल मा कु बैठू
बगत जाणे कब काल बुलादु
काल तीन भगामा बटयूँ हून्दन..... रै भग्याना
कैका काल मा कु बैठू
भुत वर्त्तमान भविष्य कु फेरु
बगत जाणे कब काल बुलादु
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
बालकृष्ण डी ध्यानी

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