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जन्मदिन

जन्मदिन 

हम मनाये जन्म दिन 
बिता वो साल पुकारे 
रह गयी बस अब 
यादों की रातें यादों के दिन 
हम मनाये जन्म दिन 
बिता वो साल पुकारे 

नये साल के नये दिन 
कुछ खोया कुछ पाया 
साल था साल जैसा गया 
इस बार ऐसा क्या होया 
हम मनाये जन्म दिन 
बिता वो साल पुकारे 

दर्द रहता है यूँ ही 
खाली खाली सा गया बिता साल 
खुशी होती है बस 
कुछ यूँ ही ऐ पल 
हम मनाये जन्म दिन 
बिता वो साल पुकारे 

पल छिन जाता है पल 
हंसता रहता है मोड़ मोड़कर 
दे जाता है हर्ष एक ओर दिन 
आगे बड़ने के के लिये 
हम मनाये जन्म दिन 
बिता वो साल पुकारे 

हम मनाये जन्म दिन 
बिता वो साल पुकारे 
रह गयी बस अब 
यादों की रातें यादों के दिन 
हम मनाये जन्म दिन 
बिता वो साल पुकारे 

एक उत्तराखंडी 

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 
बालकृष्ण डी ध्यानी
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