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आयां छन मी थे समझाणा लोक


आयां छन मी थे समझाणा लोक

अपरी ही भाग्या मा ऊ रुना छीन
क्ख्क उठे कि मी थै अब ले जाणा लोक
सिकेसरी मी थै किले सीकाणा लोक
आयां छन मी थे समझाणा लोक

क्ख्क भति लाना खैरी और्री सैरी की नोट
अपरी ही जीकोडी मा जबै लागि खोट
ये उकालु छोड़ी की किले फुंड जाणा लोक
आयां छन मी थे समझाणा लोक

थैली अंग्रेजी दगड जब तिस नि बोझनी
मरघट जैकी अब तिस बोझाणा लोक
कुटमदरी अपरुँ थे किले भुली जाणा लोक
आयां छन मी थे समझाणा लोक

बंजा अंजाडू बाटा जबै खुठा कंटु घुसैनि
बूत चप्पल खुठी किले पैरा दि लोक
अपरी संस्कर्ति हास किले कैरदी लोक
आयां छन मी थे समझाणा लोक

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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