अब की बार ऐ तू बरखा
अब की बार ऐ तू बरखा
बरखा बस तू माया की
चौदिसी दंडीयुं-पुंगडीयुं मा
तू छै जा ऐकि बस हरयालु सी
अब की बार ऐ तू बरखा
बरखा बस तू माया की
रंगमत इनि तू कैजा
छैजा बस पहाड़ों मा उल्यार सी
दानि ग्लोडी थे तू हँसै जा
दूध घीयू चाय खुभ पिलै जा
अब की बार ऐ तू बरखा
बरखा बस तू माया की
ऐ बारी हमन भारी आस धरिच
कैरी च सबुन ऐ बार तेर जग्वाली बी
देब्तों थे बी पूजी कै भगवती मंडाण बी
जगरियों जगै तेथे ऐ जा ऐ बार तू जगिकी
अब की बार ऐ तू बरखा
बरखा बस तू माया की
देख ना ऐ बारी तू कैथे बी रूले
आसूं गढ़देशा का ऊँ ढुंगा पुढे चुलै
प्रगति का बाटा मा सब थे हीटे
यकुली रैगु हम ना तू छेड़ा कैजै
अब की बार ऐ तू बरखा
बरखा बस तू माया की
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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