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नयन से छलके जाम

नयन से छलके जाम
कर दिया कम तमाम
आ गई फिर से शाम
प्याले को हाथ से थम
नयन से छलके जाम ....

उठाकर होटों से लगा
चूमतै थोडा फुसफुसा
ये मदीरा मेरे सकी
तेरे नाम तेरे नाम
नयन से छलके जाम ...

छह ते ही नशा ये सनम
मुझे आने लगा मजा
असमान उड़ता फिरू
अपने आप से भागता फिरू
नयन से छलके जाम ...

उड़ जब नशा सनम
गजब ये ढागाया
मै मय मे ना रहा
सब कुछ मेरा खोगाया
नयन से छलके जाम ...

मय से कर अब तुबा
मय बस एक धोखा
उस को न दे अब मोंका
क्यों जीवन को झोंका

नयन से छलके जाम
कर दिया कम तमाम
आ गई फिर से शाम
प्याले को हाथ से थम
नयन से छलके जाम ....
कवी बालकृष्ण डी ध्यानी
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