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खुशी की कोई उम्र नहीं होती

खुशी की कोई उम्र नहीं होती

खुशी की कोई उम्र नहीं होती
उस पर कोई जोर जबरदस्ती नहीं होती

वो तो रहती है आस पास
वो हमसे कभी दूर नहीं होती

खुशी की कोई उम्र नहीं होती
उस पर कोई जोर जबरदस्ती नहीं होती

ना तू वो कैद है ना आजाद
पल दो पल मै हो जाती मेहरबान

खुशी की कोई उम्र नहीं होती
उस पर कोई जोर जबरदस्ती नहीं होती

कभी परवान तू कभी अफशांन
गीत भी खोजे खुशी का ठिकाना

वो तो रहती है आस पास
वो हमसे कभी दूर नहीं होती

यंही कंही गिरी उठाने की जरूरत है
रूठा होवा है कोई मनाने की जरूरत है

वो तो रहती है आस पास
वो हमसे कभी दूर नहीं होती

खुशी जीने का एक मन्त्र है
संसार का एक अटुँत तंत्र है

खुशी की कोई उम्र नहीं होती
उस पर कोई जोर जबरदस्ती नहीं होती 
कवी बालकृष्ण डी ध्यानी
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