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धडकत है दिल याने मै जिन्दा हूँ

धडकत है दिल याने मै जिन्दा हूँ


सुखी डाल की तरहां मै ताना हूँ 
मै अपने आप से बना हूँ 

छाहाँ और धुप की तरहां खिला हूँ
तुम्हारी तरहां ही मुझा मै भी 
अहंकर अड्म्भर घमंड लिप्त हूँ
सांस ले रहूँ याने मै जिन्दा हूँ

मनवा हों मै मनवा हूँ 
सबसे बड़ा दानव हूँ 
अपने मन से अपने विचारून से
स्वार्थी सेवा भावना से 
अंखें खुली याने मै जिन्दा हूँ 

खुले अम्बर को देखा रहा हूँ 
आशा दीप जला रहा हूँ
अपने मन को माना रहा हूँ
जैसे आपने लिये ही जी रह हूँ 
हलचल हो रही याने मै जींदा हूँ 

धडकत है दिल याने मै जिन्दा हूँ
सुखी डाल की तरहां मै ताना हूँ 
मै अपने आप से बना हूँ 


बालकृष्ण डी ध्यानी

देवभूमी बद्री केदारनाथ
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कवी बालकृष्ण डी ध्यानी
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