हैरत है मुझ को आपने आप पर
दिल मै चुब रहे है हमारे नस्तर
कैसे हो रहे हम अपने गड़ से बेखबर
उत्तरखंड से क्यों फेरी अपनी नजर
दिल मै चुब रहे है हमारे नस्तर
कैसे हो रहे हम अपने गड़ से बेखबर
उत्तरखंड से क्यों फेरी अपनी नजर
कवी बालकृष्ण डी ध्यानी
Balkrishna dhyani
जुलाई 16, 2011
देहरादून
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