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घुगुती तू केले होणी उदास

घुगुती तू केले होणी उदास 

घुगुती तू केले होणी उदास 
म्यारा स्वामी च्या 
सात सामुद्र पर ..........
ओंकी याद मा तू ना रोई 
सुध बुध आपणी ना खोयी 
घुगुती तू केले होणी उदास 
म्यारा स्वामी च्या 
सात सामुद्र पर ..........
बरखा की रिघ लगी च्या आज
कला कला बादल 
किले चिरडयानवाला आज
म्यार असूं की तरह 
ये भी रोणा वाला आजा 
घुगुती तू केले होणी उदास 
म्यारा स्वामी च्या 
सात सामुद्र पर ..........
प्रीत की तिष ना जण वाला
परदेश जो जण वाला 
अपरी जी का छुडी 
कण के रहण वाला
घुगुती तू केले होणी उदास 
म्यारा स्वामी च्या 
सात सामुद्र पर ....

बालकृष्ण डी ध्यानी 

देवभूमी बद्री केदार नाथ
  


कवी बालकृष्ण डी ध्यानी
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