ADD

कण चमकी घाम हिमाली मा


कण चमकी घाम हिमाली मा 

कण चमकी घाम हिमाली मा 
ये गैयी घाम हिमाली मा
माँ भगवती की चरणु मा 
कण लटणुव् घाम हिमाली मा 

बद्री केदार को धाम
घंटी-घंटा को घणघणत
शंक डमरू ताल कु नाद
लेकी ये गैयी आरती को थाल हिमाली मा
ये गैयी घाम हिमाली मा
कण लटणुव् घाम हिमाली मा .........

डंडी कंडी चमकी गैनी
चाखला पखः उडी गैनी 
रुल्युं गद्न्युन का छाला
आपर रैबार दे गैनी 
पुणगडी सरीयूँ थै दुलारा 
कण लग्णदी माया हिमाली मा   
कण लटणुव् घाम हिमाली मा .........

तेडा मेडा सडकी 
उन्दारू  उकालू म्यार बटा
कभी ना आयी  खैरी 
गाम भी आयी सुबैर
दीदी भूली सीनयींच घैर
अब उन की उठाणक देर
मुखडी मा पडू तेरु झुअलू 
नींद उडीगेई पूअर
कण लटणुव् घाम हिमाली मा .........

तू आएजा  याणी रोज 
मी ती थै  याद करणुच  भुलह 
कोयाडी मा ना लुकी जा
म्यार मन थै भी चमकी जा
म्यार दण्ड कांड  घर दर 
गाम बाट भुल भूली 
म्यार गड देश दमकी जा 
कण लटणुव् घाम हिमाली मा .........

कण चमकी घाम हिमाली मा 
ये गैयी घाम हिमाली मा
माँ भगवती की चरणु मा 
कण लटणुव् घाम हिमाली मा 


बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री -केदारनाथ 


कवी बालकृष्ण डी ध्यानी
Reactions

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ