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पहाड़ मा म्यार बिजली गयाई


पहाड़ मा म्यार बिजली गयाई


बिजली गयई बिजली गयाई
बथों का घून्घट सी होई  चट गयाई
सरू गावों अंधेरु हुये गयाई
बुडी थै मुंडेर हुये गयाई 
बिजली गयाई बिजली गयाई 

राती की थी बेल 
मंजी बनाणी छ रसोई मा फंडू 
तड़का मरणीच देर तब गयाई 
बोई बोला कण मांडू मरू ये बिजली की
अबरी बक्त जणी छ ती थै 
बिजली गयाई बिजली गयाई 

दादी बैठी छ टीवी देख्यानी 
प्रतीज्ञ धरवाहीक था चलणु  
मजेदार सीन आयी तब गयाई 
कंण बंजा पुडा ये बिजली थै 
आब जण ती थै क्या रे बेटा 
थूडा बेला बाद कीले णी गयी 
बिजली गयाई बिजली गयाई

दादा जी बैठन छ बरंदम
घुड घुड गुडगुडी खीचण छन
यक सनस खीची तब गयाई 
दाद झट कई की  बोल्याई 
कंण कंडा पड़ा ये बिजली मा 
सवेर शाम रात बकत जणी 
अपर सरकार क्या करणी
बिजली गयाई बिजली गयाई 

अगण भूल भुल्य था खेलण छ 
सबकी दकील छ खाण तब गयाई 
भूल भुल्य जुररा की चीलाई 
बिजली गयाई बिजली गयाई 
मंजी भीतर बाठीक बती लाई 
झट कर बिजली आयी 
माँ बती फिर बोजहाई तब गयाई     
बिजली गयाई  बिजली गयाई 

बिजली गयाई  बिजली गयाई 
बथों का घून्घट सी होई  चट गयाई 
सरू गावों अंधेरु हुये गयाई 
बुडी थै मुंडेर हुये गयई 
बिजली गयाई  बिजली गयाई 


बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमी बद्री केदार 


कवी बालकृष्ण डी ध्यानी
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