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हर दम वो मेरा साथ निभाती रही


हर दम वो मेरा साथ निभाती रही 


अंचल की तरह सरकती रहती 
सद मंद मंद मुस्कराती रही 

आपना दर्द छुपती रही 
मेरी बगीय सजती रही 

गीतों मै मेरे रचती  सवांरती रही  
आँखों मै मेरी वो बस्ती रही 

पलकों की तरहां वो उठाती-गिरती रही  
काले सुरमे की तरह उन के कोने मै लगती रही 

नाक की नथनी की तरह चमकती रही 
कान की बाली की तरह झूमती रही 

माला की तरहं गले से मेरी वो लटकती रही
माथे बेंदी बनकर मेरे भाग्य मै दमकती रही 

पायल की तरह छामकती रही 
मेहंदी की तरह वो महकती रही 

लाली की तरह वो फैलती 
उठों पर आकर और भी खीलती रही

चूडी की तरह वो खनकती रही 
मुदरी की तरह वो लीपटती रही 

केश मै गजरे की तरह  लगती रही 
साडी के दुपटे की तरह वो ढकती रही 

आईने मै मेरे हरदम सजती रही 
अपने आप से वो लडती रही 

मेरी संगनी मेरी साथी बनकर 
मेरे एक पग से अपना पग मिलती रही 

सुख  और दुःख  मै  मुझे याद आती रही 
हर दम वो मेरा साथ निभाती रही 

अंचल की तरह सरकती रहती 
सद मंद मंद मुस्कराती रही 

आपना दर्द छुपती रही 
मेरी बगीय सजती रही 

गीतों मै मेरे रचती  सवांरती रही  
आँखों मै मेरी वो बस्ती रही 


बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमी बद्री-केदारनाथ 



कवी बालकृष्ण डी ध्यानी
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