मेरी जागवली
कैण कणी ये जागवली
ये मेरी बोई ये उत्तराखंड की जागवली
मी छुओं एक पहाडी
बोली च मेरी गड्वाली
बोली बोली ही रेगे तु
भाषा तु णा बन पाई
कैण कणी ये जागवली
ये मेरी बोई ये भाषा की जागवली
मी छुओं पहाड़ की नारी
मेरी व्यथा च न्यारी
आंखी हसणी च
जेकोड़ी मेरी रोई
कैण कणी ये जागवली
ये मेरी बोई मेरी मंख्युनो की जागवली
नया दिणु नयी बता
याख अब तक ओई दीण ओई रात
मीलणी अब तक अपरू साथ
गीतंगा गीत लगाण इतीह्स
कैण कणी ये जागवली
ये मेरी बोई मेरी संस्क्रती की जागवली
कखक गयई पहड़ों की हरयाली
प्रगती का नाम पर ठक गयी
नेताओं की मीठी गीचुं का बोली मा
ये मेरु पहाड़ लुटा गयई
कैण कणी ये जागवली
ये मेरी बोई ये पहाड़ों की जागवली
दारू का रेला लाग्यांण छान
जीथे भी देखा टुंडा बाण छान
पत्ती पत्ती पीसता पीसता
पुंगड़ दार मंडर घर-बार बीका छण
कैण कणी ये जागवली
ये मेरी बोई ये मेरा लोगों की जागवली
मेरी वेदना कैणी णी जाणी
मी थै छुड परदेश बस्य छण
कखक बातै बोलाण मी ऊँ थै
म्यार च जेबा रीता हुयांचन
कैण कणी ये जागवली
ये मेरी बोई ये मेरा गरीबी की जागवली
देवी देवता को बास च यख
साधू सन्तु को साथ च यख
बद्री-केदार को धाम च यख
भगवती को प्रताप च यख
कैण कणी ये जागवली
ये मेरी बोई ये मेरा हिमाल की जागवली
कैण कणी ये जागवली
ये मेरी बोई ये उत्तराखंड की जागवली
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदार नाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
कवी बालकृष्ण डी ध्यानी


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