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जो तड़प रह है


जो तड़प रह है 

जो तड़प रह है 
हर दम धडक रहा है 
धक् धक् कर 
पल पल मचल रहा है
जो तड़प रह है 

कीतनी वेदना 
कीतनी तकलीफ
कीतनी परेशानी 
कीतनी चींता
अकेला ही झुज रहा है
जो तड़प रह है 

कभी करहा रहा है
कभी बहला रहा है 
कभी चिला रहा है
कभी सिसका रहा है 
दर्द को आपने ही सह रह है  
जो तड़प रह है 

वो भूखा है
वो प्यासा है
वो मजबोरहै 
वो बहुँत दूर है 
वो आपने गम से चूर है 
जो तड़प रह है 

कभी गाता है 
कभी रोता है 
कभी हँसता है 
कभी सीकुडता है 
ओ आपने पर ही बिगड़ता है 
जो तड़प रह है 

कभी पा रहा है 
कभी खो रहा है
कभी मील रहा है 
कभी बीछड रहा है
पर सब यां ही खो रहा है 
जो तड़प रह है 

सुख-दुःख 
मै आपने को ना पा रहा है
अकेला ही अपने 
बनाये पद चिन्हों मै चला जा रह है 
जो तड़प रह है   

जो तड़प रह है 
हर दम धडक रहा है 
धक् धक् कर 
पल पल मचल रहा है
जो तड़प रह है 

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत



कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 
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