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मै और आपने



मै और आपने 

आज खुद को समजने चला 
आज अपनाओ को मनाने चला 
रूठे हुये है उनको साथ लाने चला 
मै अन्ना का साथ निभाने चला 

आपना भार स्वंय उठाने चला 
गीत पुराना गुन गुनने चला 
देश भक्ती का जज्बा जगाने चला
मै अन्ना का साथ निभाने चला

मुझे फिर याद आगई वो लाठी 
अन्हींश के रहा जब मै बड़ा आगे
दूर मुझे राज घाट मै वो खडा दीखा 
मै अन्ना का साथ निभाने चला

अपना फ़र्ज़ अदा करने चला 
भ्रस्ताच्चार त्रस्त मेरे देश को 
आपनो से ही आजाद करने चला 
मै अन्ना का साथ निभाने चला

आज खुद को समजने चला 
आज अपनाओ को मनाने चला 
रूठे हुये है उनको समजने चला 
मै अन्ना का साथ निभाने चला

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमी बद्री-केदारनाथ


कवी बालकृष्ण डी ध्यानी 


मेरा ब्लोग्स 
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