प्रीत निराली
प्रेम की परिभाषा अति निराली
मधमती रहे चंपा की वो बेली
कहती है सखी ओ मेरी सहेली
ये तो है एक अजब सी पहेली
प्रेम की परिभाषा अति निराली ......
दिये संग जले है देखो बत्ती
बिती ना ऐसी कोई भी राती
पत्ती पत्ती मै बिखरे फुल पत्ती
काँटों संग ही खिले है प्रीती
प्रेम की परिभाषा अति निराली.......
राधा को पुकारों या मीराँ का लों नाम
उनकी प्रीती का बोलो क्या दों नाम
चाहे वो मेरे या तेरे घनश्याम
प्रीत की इस रीत बस लो मै नाम
प्रेम की परिभाषा अति निराली .....
प्रेम की परिभाषा अति निराली
मधमती रहे चंपा की वो बेली
कहती है सखी ओ मेरी सहेली
ये तो है एक अजब सी पहेली
प्रेम की परिभाषा अति निराली ......
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
कवी बालकृष्ण डी ध्यानी

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