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नेता और गढ़ राजनीती

नेता और गढ़ राजनीती

बीता दिणो की बीती बात
बल ऐगे एक नये प्रभात
छुड़ा भुलों पीछणे की बात
ऐगे विधान सभा चुनोवा
चला करोला नयी शुरवात
बीता दिणो की बीती बात ....

भ्रसटाचार बल हर जगे छेगे
पांचा वर्ष हमरी याद ना ऐ
नेता तेर कण बंजा पुअडै
खै खा की अब हाथ जोडै
कथनी करणी मा फर्क व्हये
बीता दिणो की बीती बात ....

मुख्या थै गददी थै हटे
क्या सोची ये प्रपंच लडै
लोकयुकत लैकै तीला
अपरू वोट बैंक को बडे
बाजु का दल रहेगे खडे
बीता दिणो की बीती बात ....

बाजु का नेता देख जगे
उतरखंड को रेल अब ऐगे
जनता को सपुनीय जागे
माया का मन फिर भरमै
कंण कूटनीत की चाल चले
बीता दिणो की बीती बात ..

प्रगती का नाम मा बासै
दूँण सैण मा राजधानी रंचै
पहाडा की राणी को छुड़ के
शहर मा राजा को दरबार लगे
क्रांती की आवाज फिर दबे
बीता दिणो की बीती बात ..

जब चली ना बात इन मा
विस्की रअम का फार्मूला लगे
एक पैक पी पीला की
भै भूलोंह का गम थै भुले
देख तेर वोट की राजनीती
म्यार गढ़ देशा का दिल दुखै
बीता दिणो की बीती बात ..

बीता दिणो की बीती बात
बल ऐगे एक नये प्रभात
छुड़ा भुलों पीछणे की बात
ऐगे विधान सभा चुनोवा
चला करोला नयी शुरवात
बीता दिणो की बीती बात ....

भ्रसटाचार बल हर जगे छेगे
पांचा वर्ष हमरी याद ना ऐ
नेता तेर कण बंजा पुअडै
खै खा की अब हाथ जोडै
कथनी करणी मा फर्क व्हये
बीता दिणो की बीती बात ....

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

कवी बालकृष्ण डी ध्यानी
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