ओ उंगली स्पर्श की
उंगली का स्पर्श तु कैसे भूलह
जिन हाथों से तु बचपन झुल्हा
तकलिफा नहीं होई तनिक भर भी
इस उम्र मै तुने उन्हे बीच रहा छुड़ा
उंगली का स्पर्श तु कैसे भूलह .......
लगानै लगा बोझ जो था बहुँत थोड़ा
आया उनका मोड़ा तु आपने को मोड़ा
जिसने तेरी खुशी के लिये सब छुड़ा
उनके आखरी पड़वा तुने उनको छुडा
उंगली का स्पर्श तु कैसे भूलह .......
माँ पिताजी पुकरतै जीवाह नहीं थकती थी कभी
उनकी प्रेम वर्षा तेरे लिये कभी रुकती नहीं थी कभी
अपनी बस्ती बस्ती उनकी कश्ती टुटा गयी क्यों
जीवनभर की उनकी कुंजी इस तरंह रूठ गयी
उंगली का स्पर्श तु कैसे भूलह .......
अब भी वक़्त है मोका है अपने को बदल ले
ना जाने फिर ये वक़त क्या करवट बदल ले
आज खडे माँ पिताजी जिस छुड पर
ना आये तेरे जीवन मै ओ मोड़ा फिर मोड़कर
उंगली का स्पर्श तु कैसे भूलह .......
उंगली का स्पर्श तु कैसे भूलह
जिन हाथों से तु बचपन झुल्हा
तकलिफा नहीं होई तनिक भर भी
इस उम्र मै तुने उन्हे बीच रहा छुड़ा
उंगली का स्पर्श तु कैसे भूलह .......
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
कवी बालकृष्ण डी ध्यानी

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