
दूर कंही
पल टूट टूटकर
साथ छुट छुटकर
जा रहा है कंही
देख दूर कंही ...२
यादों का समंदर
लहरों पर बहकर
साहिल पर पहुँच कर
देख रुला रहा है कोई
देख दूर कंही ...२
आँखों की तड़प
सीने से उछालकर
दिल मै उबलकर
पिघला रहा है कोई
देख दूर कंही ...२
धडकन के संग
चल चलकर कोई
यादों के संग अब
याद आ रहा है कोई
देख दूर कंही ...२
पल टूट टूटकर
साथ छुट छुटकर
जा रहा है कंही
देख दूर कंही ...२
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
बालकृष्ण डी ध्यानी

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