
धुआँ ज़िंदगी का
यंह वंहा जंह फैला है धुआँ….२
उड़ रहा कंही कंही बैठा है दिल मे बस है धुआँ
यंह वंहा जंह फैला है धुआँ….२
रह नही सकते उसके बिन अब उसके बिन
चारों तरफ से घिरा है वो बन मेरी वफ़ा
अकेला है तू साथ है वो
भीड़ मे भी वो पास है
यंह वंहा जंह फैला है धुआँ….२
उड़ रहा कंही कंही बैठा है दिल मे बस है धुआँ
यंह वंहा जंह फैला है धुआँ….२
अँधेरा अंदर अब पास है धुआँ फिर भी साथ है
उजालों का कश कहता गला झूलसा देता
जो भी पास है उसमे भी वो आज है
चैन ना मिले ना मिले वो जब तक ना उड़े वो धुआँ
यंह वंहा जंह फैला है धुआँ….२
उड़ रहा कंही कंही बैठा है दिल मे बस है धुआँ
यंह वंहा जंह फैला है धुआँ….२
फ़िक्र है उसी की नकल भी है उसी की
देख सबके सब लगे आज है यंहा धुआँ उड़ता कँहा कँहा
बेकरा बनाने को सब वो धुआँ
निगल जाये सबको एक दिन उड़ता रहेगा बस अब यंह धुआँ
यंह वंहा जंह फैला है धुआँ….२
उड़ रहा कंही कंही बैठा है दिल मे बस है धुआँ
यंह वंहा जंह फैला है धुआँ….२
धुआँ का ही खेल धुआँ से ही मेल है
ज़िंदगी धुआँ कर रहा बस जलता हुआ सिगरेट है
हाथों पर दबा ओंठो पर सुलगा मचल रहा
जिस्म के कोने कोने तक पहुंचा बस धुआँ
यंह वंहा जंह फैला है धुआँ….२
उड़ रहा कंही कंही बैठा है दिल मे बस है धुआँ
यंह वंहा जंह फैला है धुआँ….२
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
बालकृष्ण डी ध्यानी

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