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दुःख बुल्दू


दुःख बुल्दू 

दुःख बुल्दू मीसे 
सुख तोल दू मी तुला से 
मी बुल्दू मैसे 
हर्ची गै मी आप्ड़ा से.....२

बंजा पौडयाँ पुंगडा बोल्दा 
रीटा डंडा किले वहला रूणा
रूणा रूणा कू रुंदा रुंदाली
टूटा पड्यां वा माटा का कूड़ा 
मी बुल्दू मैसे 
हर्ची गै मी आप्ड़ा से................२ 

हस्दा हस्द किले रूणा 
अपरा अपरी मा किले व्हाला फुंडा
फुंदा भी एक कैकी फुंडा वहई
जिकोदी ले सारु आँखों का रुदयई 
मी बुल्दू मैसे 
हर्ची गै मी आप्ड़ा से................२ 

याद भी बिसरी गीयुं 
रिती रिवाज भूली गैयूँ 
संस्क्रती भी रोणी छे मेरी 
बोली मेरी भी भूल्दी गैयुं 
मी बुल्दू मैसे 
हर्ची गै मी आप्ड़ा से................२ 

ढोल दामू भी खूब बाजी 
ब्यो बारती मा खूब नाची 
टुंडा टुंडा भी यख फुंडा हूँ 
बेटी ब्वारी अब कीले होली रोणी 
मी बुल्दू मैसे 
हर्ची गै मी आप्ड़ा से................२ 

दुःख बुल्दू मीसे 
सुख तोल दू मी तुला से 
मी बुल्दू मैसे 
हर्ची गै मी आप्ड़ा से.....२

एक उत्तराखंडी 
बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com 
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

बालकृष्ण डी ध्यानी
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