ADD

वो मेरे अपने


वो मेरे अपने 

देख कर हैरान हूँ 
खुद से ही परेशान हूँ 
टूट रहे है सपने मेरे 
लुट रहे बस अपने मेरे 
टूट चुका हूँ थोड़ा बाकी हूँ 
अब भी 

रोज एक एक कर 
निगलता जा रहा है वक्त मुझे 
लक्ष्य मेरा आगे आगे और आगे 
मै बस उसके पीछे पीछे 
टूट चुका हूँ थोड़ा बाकी हूँ 
अब भी 

यकीन तो मै करता हूँ खुद पर 
पेशानी उभरी लकीरों से लड़कर 
विशवास के साथ थोड़ा चलकर
होगा कुछ असर उस कल पर 
टूट चुका हूँ थोड़ा बाकी हूँ 
अब भी 

चुना था जिनको मैने भेजा वंहा 
चुनवा पर मेरे प्रश्न चिन्ह लगाये बैठे वो 
कितना दल दल बदलेंगे वो देखना है 
थोड़ा बाकी है और थोड़ा टूटना है 
टूट चुका हूँ थोड़ा बाकी हूँ 
अब भी 

देख कर हैरान हूँ 
खुद से ही परेशान हूँ 
टूट रहे है सपने मेरे 
लुट रहे बस अपने मेरे 
टूट चुका हूँ थोड़ा बाकी हूँ 
अब भी 

एक उत्तराखंडी 
बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com 
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

बालकृष्ण डी ध्यानी
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