
मेर पाड़ी भुल्हा
कुछो ऐ पाड़ी
देखूंयूँ भ्ल्युं च तुम्हारा
कंन रंगमत छ
अग्ने पीछने की बाहार
कुछो ऐ पाड़ी
दादा छ की भुल्हा
पर वो छ हमारा
भैजी बुल्दो मीथै
ऐ छ भुल्हा की अंगवार
कुछो ऐ पाड़ी
दिखदो भलो छ
करदो काम मी भलो
मेरा पहाडा की
वा च एक लगवाल
कुछो ऐ पाड़ी
हाथ बोट्या छन
टोपला मोडमा धार
ऐनी छ तुम थै भी
अपरा भुल्हा की याद
कुछो ऐ पाड़ी
कुछो ऐ पाड़ी
देखूंयूँ भ्ल्युं च तुम्हारा
कंन रंगमत छ
अग्ने पीछने की बाहार
कुछो ऐ पाड़ी
एक उत्तराखंडी
चित्र भुल्हा माहि मेहता जी का है
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
बालकृष्ण डी ध्यानी

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