
बै टाईमा की निंदी
बैठी बैठी सर निंदी आई
झट निंदी टूटी मोंड़ों रिंगी ग्याई
कू बगत क्या बेल होली
सरू अंदाज अब फेल वहाई
बै टाईमा की निंदी ऐ.......२
हयून्द पड़यूँ गढ़देश मेरु
भीतर भैर दूर तक मा धंडू पड़यु
वार पार भीतर भैर कोयेडी लागी
मनखी अपरा मा ही सैर बैर लगी
बै टाईमा की निंदी ऐ.......२
क्या छु ऐ क्या धाम छों ऐ
मी भुल्गे मैसे यख मै क्या काम च ऐ
बै टाईमा की निंदी थोडू आराम दै
सबैर दोपहरी ब्योखोंन मैसे हरचे
बै टाईमा की निंदी ऐ.......२
छुटीगै आज की ध्याड़ी कमै
रोजगार को अब खाडू व्हैगे
पेट की नींद अब धारू व्हैगे
बै टाईमा निंदी तिकडम कैगे
बै टाईमा की निंदी ऐ.......२
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
बालकृष्ण डी ध्यानी

0 टिप्पणियाँ