
सुनीता जी
सु से सुंदर
नी से नीयती
ता से तारा
सुनीता एक
अलोकिक सितार
चम चमके
भू भाग का
वो किनार
हलचल साथ
साथ तुम्हरा
छवी सुंदर
हंसी वर्णीत
गणीत गनीत
आकर सगुणीत
ध्वन्यालोकनय
चक्षु सलोचनय
बालप्रियासहित
सम्पूर्ण सुनीता
प्रधान-गुणतम
भावाभ्यां पुर्णीमा
विधातव्या सार
सहृदयैर्न निहर
सु से सुंदर
नी से नीयती
ता से तारा
सुनीता एक
अलोकिक सितार
चम चमके
भू भाग का
वो किनार
धन्यवाद
आपका
बालकृष्ण धि. ध्यानी
देव भूमि बद्री-केदार नाथ
बालकृष्ण डी ध्यानी

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