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बोई मेरी


बोई मेरी 

बोई मेरी 
तू क्ख्क छे खोई 
आंखी मेर ऐ रूणी या 
तू क्ख्क गै हम थै छोडी

लगी रूं राता ताक ऐ अगसा 
ऐ शोर बोई बस तेरु पासा 
ज्यूनी मा कबी हंसे जा बोई 
एक दा तू कबी दिखे जा

बोई मेरी 
तू क्ख्क छे खोई 
आंखी मेर ऐ रूणी या 
तू क्ख्क गै हम थै छोडी

देख रुसू बैठ्युं बोई 
आके मी थै तू बथै जा 
होऊंस पुरी कैदे मेरी 
मुंड माया से मलसे जा 

बोई मेरी 
तू क्ख्क छे खोई 
आंखी मेर ऐ रूणी या 
तू क्ख्क गै हम थै छोडी

पता च तिल नी ऐंन अब 
दूर भतेक एकदा मुखडी दिखे जा 
कंन रैंन मील तेरा बिना 
य्क्दा फिर तू मी समजे जा 

बोई मेरी 
तू क्ख्क छे खोई 
आंखी मेर ऐ रूणी या 
तू क्ख्क गै हम थै छोडी


एक उत्तराखंडी 
बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com 
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

बालकृष्ण डी ध्यानी
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