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दिल अब भी


दिल अब भी

दिल अब भी धडकता है 
सीने में............... 
उस कोने से अब भी वो 
कुछ कहता है............
दिल अब भी 

दबी दबी साँसों 
बंधी बंधी निगाहों से 
सहमे सहमे उन अदाओं से 
चुपचाप बुलाया करता है 

दिल अब भी धडकता है 
सीने में............... 
उस कोने से अब भी वो 
कुछ कहता है............
दिल अब भी 

बूंद ही वो जमी है शायद 
अश्क के साथ जो गिरी होगी 
पलकों पर कुछ देर थम कर 
आँखों को छूकर कुछ कही तो होगी 

दिल अब भी धडकता है 
सीने में............... 
उस कोने से अब भी वो 
कुछ कहता है............
दिल अब भी 

रूठ है वो मनना है उनको 
दूर है उसे और पास लाना है मुझ को 
काश की ऐ दूरियाँ नही होई होती 
आँखों में मेरे फिर नमी नही होती

दिल अब भी धडकता है 
सीने में............... 
उस कोने से अब भी वो 
कुछ कहता है............
दिल अब भी 

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com 
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

बालकृष्ण डी ध्यानी
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