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कलम तू चलती चल


कलम तू चलती चल 

देख तो मै भी रहा हूँ 
सोच तो मै भी रहा हूँ 
बोल तो मै भी रहा हूँ 
लिख पर क्यों नही रहा हूँ 
हे कलम तू चलती चल 
एक नये पथ पर बढती चल 
हे कलम तू चलती चल 

खाली पड़ा है पन्ना वो 
देखे बस तेरा अब रास्ता वो 
एक नया एक नयी कविता 
कल्पना को हकीकत जोड़ता चल 
हे कलम तू चलती चल 
एक नये पथ पर बढती चल 
हे कलम तू चलती चल 

तु ही लिखेगी बदलवा की कहनी 
तू ही लिखेगी लगवा के रिश्ते बातें 
तु ही आज,अब,कल का इतिहस 
देख कुछ ना हो जाये हास् यंहा 
हे कलम तू चलती चल 
एक नये पथ पर बढती चल 
हे कलम तू चलती चल 

सब कुछ जुडा तुझ से 
सब कुछ मिला तुझ से 
हार-जीत से सबक लेता चल 
अपने पराये से जुड़ता चल 
देख कुछ ना रह जाये बाकी 
हे कलम तू चलती चल 
एक नये पथ पर बढती चल 
हे कलम तू चलती चल 

राग द्वेष सब भूलकर 
शांती एकता के मार्ग बढ़ता चल
लेखन तेरी ऐसी रहा है 
सब धर्म को भी स्वीकार है 
हे कलम तू चलती चल 
एक नये पथ पर बढती चल 
हे कलम तू चलती चल 

देख तो मै भी रहा हूँ 
सोच तो मै भी रहा हूँ 
बोल तो मै भी रहा हूँ 
लिख क्यों नही रहा हूँ 
हे कलम तू चलती चल 
एक नये पथ पर बढती चल 
हे कलम तू चलती चल 

एक उत्तराखंडी 
बालकृष्ण डी ध्यानी 
देवभूमि बद्री-केदारनाथ 
मेरा ब्लोग्स 
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com 
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत 

बालकृष्ण डी ध्यानी
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