मेरा देश चाहता है
बातों ही बातों में वो बात कर रहा है
अपनों ही अपनों के वो साथ चल रहा है
मेरा देश चाहता है ……………२
एक माला में एक एक वो मोती पेर रहा
सपनों को सपनो संग अपनों को देख रहा है
मेरा देश चाहता है ……………२
सोच सोच में सोच कर नई खोज कर रहा
लहरों लहरों की मौज पर वो मौज कर रहा
मेरा देश चाहता है ……………२
एकता अखंडता अहिंसा के साथ सो रहा है
हर एक मुख मुख से बस मेरा देश बोल रहा है
मेरा देश चाहता है ……………२
बातों ही बातों में वो बात कर रहा है
अपनों ही अपनों के वो साथ चल रहा है
मेरा देश चाहता है ……………२
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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