तुम खुशीयाँ लो
हम को तो गम मिले हैं
तुम खुशीयाँ लो
काँटों पर पग धरे है
तुम फूलों पर चलो
हम को तो गम मिले हैं
तुम खुशीयाँ लो……
वफ़ा बेवफ गलियों में
वफ़ा साथ आयी हमारे
बेवफा के गलियों में
तुम अब आगे बड़ो
हम को तो गम मिले हैं
तुम खुशीयाँ लो……
उजालों अंधेरों की रहा में
हमको अंधेरों ने पुकार
रोशनी चाह थी तुम्हे
उजालों के नये सपने बुनो
हम को तो गम मिले हैं
तुम खुशीयाँ लो……
मिले तुम्हे जिसकी
वो जो चाह है तुम्हे
हम खुश है इसी में
वो अब तुमको मिले
हम को तो गम मिले हैं
तुम खुशीयाँ लो……
हम को तो गम मिले हैं
तुम खुशीयाँ लो
काँटों पर पग धरे है
तुम फूलों पर चलो
हम को तो गम मिले हैं
तुम खुशीयाँ लो……
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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