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मन मंदिर


मन मंदिर

मन मंदिर का अजब खेल
माया मिले तो तभी चढ़ेगा तेल

भाव भक्ती का ,कैसे रंगा आज
अंदर बाहर बस चेहरा सजा आज

झुके दर पे सब है तेरा
पग निकले बाहर सब मेरा

शांती कंहा मिलेगी किस दिशा ओर
मन भीतर नाचे कई मोर

आत्म को परमात्म से मिलाऊँ
ऐसा गुरु कंहा से खोज मै लाऊँ

दिखाव ही दिखावा चाहों ओर
अहंकार माया इर्षा बोले वन्स मोर

मन मंदिर का अजब खेल
माया मिले तो तभी चढ़ेगा तेल


एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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