मी थै
ले जाणी चा
आच मी थै .. वो
क्ख्क
ले जाणी च ....
माया का गेडों बांधी कि
मै दगडी माया लगै कि
ल्त्लूं थै यख वख फिरे कि
क्ख्क
ले जाणी च ..
आच मी थै .. वो
क्ख्क
ले जाणी च ......
स्वाणी मुखडी हैन्सी कि
जीयु मेरु मैसे चोरी कि
वै थे अपरो बणे कि
क्ख्क
ले जाणी च ..
आच मी थै .. वो
क्ख्क
ले जाणी च ....
कुदगली छुंई वीं कि
क्नुडी रस घुले कि
पिरत गीत लगे कि
क्ख्क
ले जाणी च ..
आच मी थै .. वो
क्ख्क
ले जाणी च ....
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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