पहाड़ की बेटी
पहाड़ जब रो रहा था
अपनों का दर्द बिलख रहा था
कैसे ना आती पहाड़ की बेटी….२.
आँखों से उसकी वो दर्द छलक रहा था
पहाड़ जब रो रहा था…………
अपनों ने पुकार था उसको
अपनों का सहारा थी वो
भागी भागी चली आयी वो पहाड़ की बेटी….२.
कभी जन्म लिया था इस धरा पर उसने
पहाड़ जब रो रहा था…………
आँखों में जगी आशा की किरण
आँखों ने ही थमा अब उसका दमन
उन आंसु को पूछने आयी देखो वो पहाड़ की बेटी….२
उसकी आँखों ने अब कह दिया है सब कुछ
पहाड़ जब रो रहा था…………
पहाड़ जब रो रहा था
अपनों का दर्द बिलख रहा था
कैसे ना आती पहाड़ की बेटी….२.
आँखों से उसकी वो दर्द छलक रहा था
पहाड़ जब रो रहा था…………
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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