मेर जिकोड़ी
जिकोड़ी कणी धड़क धड़क
बरखा लगी छरक बरक
सौंण मैना कू बरसाता
हिया मेरु किले तू उदास …… स्वामी मेरा नी छे घौरा आजा
बण मा वहैगे सर र र
डौर ऐगे जीयु गर र र
मी यकुली ये यकुली राता
मेरु दगडी ये लगाणी यकुली बाता …… स्वामी मेरा परदेश आजा
रै गे मेरु मै मा दब्युं
हर्ची गैन मै मा सब्युं
जै थे मीळ ईं जीयूं संभाली
वहैगे सबी मैसे दूर आजी…… स्वामी मेरा तुम बी कख छा आजा
जिकोड़ी कणी धड़क धड़क
बरखा लगी छरक बरक
सौंण मैना कू बरसाता
हिया मेरु किले तू उदास …… स्वामी मेरा नी छे घौरा आजा
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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