रहे याद बस
भूल जाता हूँ
याद कुछ रहता नही
रहे याद बस
तेरा इन्तजार …इन्तजार
उसमे बसा बस तेरा प्यार
वो आँखें कर के चार
दिन रात बस तेरा ख्याल
रहे याद बस
तेरा इन्तजार …इन्तजार
वो नजर वो कसक
वो आशिकी का असर
चढ़ा मुझ पर इस कदर
रहे याद बस
तेरा इन्तजार …इन्तजार
महफिल मेरी तुम
मंजिल हो तुम मेरा सहर
गुजरती सांस मेरी तेरी तरफ
रहे याद बस
तेरा इन्तजार …इन्तजार
रहे हरदम मुझे
इस तरह बस तेरा इन्तजार
गुजरे सात जन्म यूँ ही
रहे याद बस
तेरा इन्तजार …इन्तजार
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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