इश्क तेरा रंग ऐसा
हर एक रंग रंगा है
हर एक अंग चढ़ा है
वफ़ा है या बेवफाई
दिल कि चाहत का नशा है
हर एक रंग रंगा है.............
यकीनन मिलते है अश्क वंहा पर
इस दिल कि राह पर जो चला है
फूलों कि चाह कि थी ऐ दिल
कंटों पर ही जा कर वो खिला है
हर एक रंग रंगा है.............
मोम कि तरह वो पिघलती रही
समा के साथ लपटों में मचलती रही
परवान हो बेखबर उस आंच से
उन नाशिली आँखों के आगोश में उतरता रहा
हर एक रंग रंगा है.............
ना कोई रंग है ना कोई रूप है
प्रेम तो बस प्रेम है वो
ना ही कोई उसका स्वरुप है
आ ही जाता है वो जिस पर आना होता है
हर एक रंग रंगा है.............
हर एक रंग रंगा है
हर एक अंग चढ़ा है
वफ़ा है या बेवफाई
दिल कि चाहत का नशा है
हर एक रंग रंगा है.............
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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