रैन बसेरा
ठंड से बचने का बसेरा
तेरा और मेरा क्या
वो रैन बसेरा
उठता ये सवाल क्यों
हर साल क्यों
इन राजनीती गलियारों में
वो रैन बसेरा
सेक दो चार दिन कि
बड़ा दो अपने वोटों कि गिनती
ले के दो चार घड़याली आंसु
वो रैन बसेरा
कुछ दिन पश्चात
पुन सा वो समान,मरे या जिये
अपने भाग सारे जिये
वो रैन बसेरा
बस दो दिन का बखेड़ा
सर्द रात कि ठिठुरती रातों में
वो अकेला खड़ा मैं अकेला
वो रैन बसेरा
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित
बालकृष्ण डी ध्यानी


0 टिप्पणियाँ