मेरु रुमाला
छुची छूटगे मेरु रुमाला,ऊ पौड़ी बजारा
बिंग नि पाई यूँ नजरि कि भासा ,ऊ पौड़ी बजारा
छुची छूटगे मेरु रुमाला,ऊ पौड़ी बजारा
नि देक पाई मि पौड़ी बहारा ,ऊ पौड़ी बजारा
बस दीकि मि न सुर्म्याली आंखी कु नजारा ,ऊ पौड़ी बजारा
छुची छूटगे मेरु रुमाला,ऊ पौड़ी बजारा
देकि तिन कब छूटी म्यार हाथों न रुमाला ,ऊ पौड़ी बजारा
संभली नि संभली जियु अब तेरा हवाला ,ऊ पौड़ी बजारा
छुची छूटगे मेरु रुमाला,ऊ पौड़ी बजारा
अंदी रैंद याद तेर मेरु छुट्यूं रुमाला ,ऊ पौड़ी बजारा
आजा भेंटी जा मी थे दे जा म्यारु छुट्यूं रुमाला ,ऊ पौड़ी बजारा
छुची छूटगे मेरु रुमाला,ऊ पौड़ी बजारा
छुची छूटगे मेरु रुमाला,ऊ पौड़ी बजारा
बिंग नि पाई यूँ नजरि कि भासा ,ऊ पौड़ी बजारा
छुची छूटगे मेरु रुमाला,ऊ पौड़ी बजारा
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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