ऊ मथा
ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २
डेरा कबि म्यारु वख
तब म्यारु मौज छा
ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २
तेड़ा-मेड़ा ऊं बाटों स्यारी
उकाली मा मुंड मा चड़ी भारा
ऊंदारु दौड़ी संघारु
चे चै मारी वख फाली
ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २
दूर गदनी बगेनी
सर सर बथों सर सरनि
तिमला औ आरु का डाळा
आल छाला पल छाला
ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २
समलौणया ऊ सब वहैगेनी
दिस ऐनि बस जि अब दिस गेनी
कबि बस्या छन वख बल
अब हम चार दिवारी कैद छन
ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २
ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २
डेरा कबि म्यारु वख
तब म्यारु मौज छा
ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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