ADD

ऊ मथा


ऊ मथा

ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २
डेरा कबि म्यारु वख
तब म्यारु मौज छा
ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २

तेड़ा-मेड़ा ऊं बाटों स्यारी
उकाली मा मुंड मा चड़ी भारा
ऊंदारु दौड़ी संघारु
चे चै मारी वख फाली
ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २

दूर गदनी बगेनी
सर सर बथों सर सरनि
तिमला औ आरु का डाळा
आल छाला पल छाला
ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २

समलौणया ऊ सब वहैगेनी
दिस ऐनि बस जि अब दिस गेनी
कबि बस्या छन वख बल
अब हम चार दिवारी कैद छन
ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २

ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २
डेरा कबि म्यारु वख
तब म्यारु मौज छा
ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित
बालकृष्ण डी ध्यानी
Reactions

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ