ये पहड़ी पहाड़ा कु तू
ये पहड़ी पहाड़ा कु तू
कख जाणू रे तू आच सुबेर -२
उठि उठि की कया पौडी गे ते फिकर
कख जाणू रे कै घारा कै सैरा कु तू
कटुम्दरी की फिकर च भैजी
ब्याली रति सबी का सबी भूकी सैगेनी
एक दाना अन्ना कु निच दार पाकी
पुट्गी की भूक की लगी च बस आग
भरण पोषण की चिंता खैनी दीदा
ये पहाड़ा को पहड़ी की जीकोडी ते खुरचानि
जानू मी भैर सबैर सबैर ये फिकर
रति मिल अपरू बान अन्न कख भत्ते लान
अब नि बची कुच बी मेरु घोर भैजी
ना पुंगड़ी ना बैल गौड ना बकरा मेंडरी
ध्याड़ी की बी नीच कूच बी ब्य्वस्था
जणू मि अपरू बाण अपरा उकाल छोड़ी की
ये पहड़ी पहाड़ा कु तू
कख जाणू रे तू आच सुबेर -२
उठि उठि की कया पौडी गे ते फिकर
कख जाणू रे कै घारा कै सैरा कु तू
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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