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मायल्दी आंखियुं की छविं


मायल्दी आंखियुं की छविं

मायल्दी आंखियुं की छविं सुणा
मायल्दी आंखियुं की छविं
कैमा ना बोल स्की
जिकडोे गेड थे ना खोल स्की
अपरा मुक से कबी गेल्या ना बोल स्की
मायल्दी आंखियुं की छविं सुणा
मायल्दी आंखियुं की छविं

दिना राति सरै गैनी
यकुली यकुली चुप चले गैनी
काम धाणी खत्म नी व्है विंकी
उमरी विंकी इनि ई गुजेर गैनी
मायल्दी आंखियुं की छविं सुणा
मायल्दी आंखियुं की छविं

ना देके ते थे ना देके कै थे
हेर सदनी विंन सरै सब थे
अपरू दुक अपरू दगड ही गैई
विं आंखी देक किले रो द्याई
मायल्दी आंखियुं की छविं सुणा
मायल्दी आंखियुं की छविं

कन बनबास भोगी विन
उफ़ नि कै कन जोगन जीबन
राम विं का सदा भैर ही राई
ये पहाड़ बोब तिल कन बेटी पाई
मायल्दी आंखियुं की छविं सुणा
मायल्दी आंखियुं की छविं

मायल्दी आंखियुं की छविं सुणा
मायल्दी आंखियुं की छविं
कैमा ना बोल स्की
जिकडोे गेड थे ना खोल स्की
अपरा मुक से कबी गेल्या ना बोल स्की
मायल्दी आंखियुं की छविं सुणा
मायल्दी आंखियुं की छविं

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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