क्ख्क लुकी गयं तुम
ऐ रे गेल्या ......
क्ख्क लुकी गयं तुम
मेरी जिकोड़ी चुरेकी
बुरडी व्हैग्युं मि यख
तुमरि बाटा हेर हेरी की
ऐ रे गेल्या ……
कन के हर्ची ऐ मेर जिकोड़ी
तुम दगडी नजरि मिलेकी
अब नि रे ये मेर दुक दुकी
अब त व्हैग्याई बस जी तेरी
ऐ रे गेल्या ......
क्ख्क लुकी गयं तुम
मेरी जिकोड़ी चुरेकी
बुरडी व्हैग्युं मि यख
तुमरि बाटा हेर हेरी की
ऐ रे गेल्या ……
कन जादू के तैन
ये मेर निर्भगी काया पर
में पास व्हैकि बी
नि रैगे औ अब मेरी
ऐ रे गेल्या ......
क्ख्क लुकी गयं तुम
मेरी जिकोड़ी चुरेकी
बुरडी व्हैग्युं मि यख
तुमरि बाटा हेर हेरी की
ऐ रे गेल्या ……
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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