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मन कु हेर



मन कु हेर

मन कु हेर तिल पछाणी नि स्की
ये रे मितरा तिल मेरु पहाड़ देकि पर पछाणी नि स्की
मन कु हेर तिल पछाणी नि स्की

देकि तिल खिली डाली बुरांस की
विं डाली की ल्जयाली सुख्याली तिल देक नि स्की
आंखों दगडी हसदरा मुखडी देकि तिल
ऊँ आंखों मा दाड़ी खैरी की माया देक नि स्की
मन कु हेर तिल पछाणी नि स्की

दूर भ्तेक देक तिल भीतर ना देकि कया देकि तिल
भैर भ्तेक देखेंदु स्ब ऊज्व्ळ अंधार भीतरी कु तू देकि नि पाई
सब लुकंद दुःख अपरा अपरा हमुन कया लुकुण सुःख
सुःख कया हूंद हमुन सुःख कबी देकि नि पाई
मन कु हेर तिल पछाणी नि स्की

मन कु हेर तिल पछाणी नि स्की
ये रे मितरा तिल मेरु पहाड़ देकि पर पछाणी नि स्की
मन कु हेर तिल पछाणी नि स्की

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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