अब ऐकि झट संभाली ले
भोर भोरिक रखणा छन तुम
रखणा छन तुम कै बाना
सारू गढ़ जबै खैल व्है जालु
परती तुम ऐंन यख कै बाना
ऋषिकेश कोटद्वार देहरादून
जख बी देक देके जालु त्वै थे ऊ
दिल्ली मुंबई भैर देश मा लाटा
रैकी की बथा तू तेरु पाड़ा क्या पालु
गौं थे खैल कैगे सब थे घैल कैगे तू
अपरू नि राई तू अब व्हैगे बिराणो तू
दौटयाल ब्यपारियों फौज भोरीगे यख
तू रैगै यख बी खैल और्री वख बी घैल तू
तेरी ही भूमि थे ऊ देक कण लुटणा छन
तेर ही अपरुँ थे देक कण ऊ कुटणा छन
तू बोळी की चली गे कुच नि धरयूं च यख
कण कैकि ऊ यख लाटसाहब बण्यां फिरण छन
सोची ली समझी ले यख एकबारी ऐकी देकि ले
कन ऊं कु बजार मंड़युंचा अपरुँ थे ही ऊंन ठग्युंचा
देर ना कर झट दौड़ी की ऐजा छूछा परती आ
अपरू पहाड़ लुटणा पैल अब ऐकि झट संभाली ले
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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