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हात म्यार रीता रैग्याँ


हात म्यार रीता रैग्याँ

हात म्यार रीता रैग्याँ
हता का रेघ
कुच लिख्याँ छन
सब मिटै मैटि की चलीग्याँ

सुप्निया मेरु
रंगै रति नि यकुली यकुली
सुबेरा ऐई वै नि
सबै तौड़ी की चली ग्याँ

मठु मठु
ब्यार भैनी च
माया कु ठण्डु
किले इतग बरद पसरियूं च

फ्योलोडी फूली
कोयेड़ी लोक्यांलि
सौंजड्य खुटयूँ
किले पराज लौंत्याली

हात म्यार रीता रैग्याँ

बालकृष्ण डी ध्यानी

देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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