वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु
वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु
वैका पहाड़ी कबीत वैका हुला
वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु
जाणा छे दूर वै भ्तेक दूर भांडी दूर
कबीत ऊ दूर गयां वै का पास पैतण हुला
वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु
वैकि ब्यारा तब वैकि हुली
जबै वैकि दीदी भूली वैका पास ना यकुली हुली
वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु
जब वैकि खुद तेथे लगी व्हाली
घुघूती घुरेली बुरांस वैका पास फुलेली व्हाली
वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु
ऐई आस मा ऊ कबी भ्तेक बैठ्युं छया
वैकी जग्वाली मा सदनी आप्ड ही छया
वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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