व्हैगे तू बिराणु
सैंति पाली की व्हैगे बिराणु
दूर चलगे पाड़ा से दूर अब तेरु थिकणु
देके ना देके तेरी नजरि थे ये सब
माया की पौड़ी गे तेरु अंख्यों मा झालौ
देके की बी कन ये बिराणु हूणु लग्युं
मेरु गढ़वाल अब ये भाना खाली हुन लग्युं
पड़ै -लिकैई यख तू निपटै की
मेरु बाबू पेटी लेकि तू क्ख्क छे जानू
नि राल तू यख कुछ बी नी यख रालु
तेर सिकेसारी मा सारू गढ़ लूटी जालु
सैंति पाली की व्हैगे बिराणु
दूर चलगे पाड़ा से दूर अब तेरु थिकणु
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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